Bokaro: बोकारो जिले के फुसरो क्षेत्र में पुलिस ने अवैध हथियार निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। बोकारो के बेरमो थाना क्षेत्र स्थित सुभाषनगर में चल रही इस अवैध फैक्ट्री से भारी मात्रा में हथियार बनाने के उपकरण और अर्धनिर्मित हथियार बरामद किए गए हैं। पुलिस ने मौके से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ जारी है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक को गुप्त सूचना मिली थी कि बेरमो इलाके में कुछ लोग अवैध रूप से हथियार निर्माण कर रहे हैं और तैयार हथियार अपराधियों तक पहुंचाए जा रहे हैं। सूचना के सत्यापन के बाद बेरमो एसडीपीओ वशिष्ट नारायण सिंह के नेतृत्व में विशेष छापेमारी टीम गठित की गई।
छापेमारी के दौरान राज कुमार सिंह उर्फ टीसी के सुभाषनगर स्थित परिसर में संचालित अवैध मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा हुआ। पुलिस ने मौके से उस्मान अंसारी, रिजवान मियां, इश्तियाज और संजय कुमार साव उर्फ संजय कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया। इनमें उस्मान अंसारी देवघर का निवासी है, जबकि अन्य आरोपी बिहार के मुंगेर जिले के रहने वाले बताए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वे लंबे समय से अवैध हथियार निर्माण के कारोबार में शामिल थे। आरोपी तैयार हथियारों को विभिन्न अपराधियों तक सप्लाई करते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन हथियारों की सप्लाई किन-किन जिलों और आपराधिक गिरोहों तक की जाती थी।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने फैक्ट्री से भारी मात्रा में हथियार निर्माण में प्रयुक्त सामान बरामद किया। इनमें 7.65 एमएम की जिंदा गोली, अर्धनिर्मित पिस्टल, पिस्टल स्लाइडर, बैरल, स्प्रिंग, ड्रिल मशीन, मोटर ग्राइंडर, लोहे के पाइप, वेल्डिंग रॉड, रेती, रिंच, पेचकस और अन्य कई उपकरण शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद सामग्री से बड़े पैमाने पर अवैध हथियार बनाए जा सकते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक इतिहास पुराना है। उस्मान अंसारी पर देवघर और मुंगेर के विभिन्न थानों में आर्म्स एक्ट समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। वहीं अन्य आरोपियों के खिलाफ भी बिहार के अलग-अलग थानों में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए गए हैं।
इस कार्रवाई में बेरमो थाना प्रभारी रोहित कुमार सिंह सहित कई पुलिस अधिकारी और जवान शामिल थे। पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह के तार दूसरे राज्यों के अपराधियों से भी जुड़े हो सकते हैं।



