Deoghar: झारखंड के Deoghar नगर निगम में इस बार विरोध का एक अलग ही रूप देखने को मिला, जहां आम जनता या कर्मचारी नहीं बल्कि खुद जनप्रतिनिधि ही धरने पर बैठ गए। नगर निगम के गठन के बाद यह पहला मौका माना जा रहा है, जब वार्ड पार्षदों ने अफसरशाही और प्रशासनिक कार्यशैली के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज कराया है।
धरने पर बैठे पार्षदों का आरोप है कि वर्ष 2019 के बाद से निगम की व्यवस्था लगातार बिगड़ती चली गई है और अफसरशाही हावी हो गई है। पार्षद Anuj Kumar ने कहा कि वे वर्षों से जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय हैं, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
पार्षदों ने यह भी बताया कि हाल ही में नगर निगम में नई जनप्रतिनिधि व्यवस्था बनने के बाद लोगों में उम्मीद जगी थी कि बुनियादी समस्याओं का समाधान होगा। हालांकि, फरवरी में नई व्यवस्था लागू होने के बावजूद हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ है, जिससे जनता और जनप्रतिनिधि दोनों ही निराश हैं।
विरोध का एक बड़ा कारण सफाई व्यवस्था को निजी कंपनी को सौंपना भी है। पार्षद Mohammad Sarwar ने आरोप लगाया कि MSW Company को सफाई की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन कंपनी पार्षदों के निर्देशों को नजरअंदाज कर रही है। इसके चलते मोहल्लों में गंदगी और जल संकट जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं।
इस पूरे मामले में नगर निगम की उपमहापौर Tip Chatterjee ने भी पार्षदों के विरोध को जायज ठहराया है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों से सफाई और पानी की समस्याओं को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पार्षदों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याएं नगर आयुक्त तक भी पहुंचाई, लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा, ताकि उनकी आवाज सुनी जा सके।
अब इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब जनप्रतिनिधियों को ही अपनी बात रखने के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस विरोध के बाद क्या कदम उठाता है और क्या निगम व्यवस्था में सुधार हो पाता है या नहीं।


