Ranchi : रांची में झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने अपनी मांगों को लेकर विरोध को और तेज कर दिया है। संघ ने संवर्ग समीक्षा समिति के गठन को अवैधानिक और पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसे तत्काल भंग करने की मांग उठाई है। इसी क्रम में संघ ने 28 अप्रैल को प्रोजेक्ट बिल्डिंग परिसर में कैबिनेट बैठक के दौरान मानव श्रृंखला बनाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इस विरोध कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सचिवालय कर्मियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
संघ ने अपनी आपत्तियों को लेकर राज्यपाल सह कुलाधिपति और मुख्यमंत्री को पत्र भी भेजा है। इसमें कहा गया है कि सचिवालय सेवा के पुनरीक्षण के लिए गठित समिति का गठन सही प्रक्रिया के तहत नहीं किया गया है। संघ का आरोप है कि यह समिति केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के 30 सितंबर 2022 के पत्र के आधार पर बनाई गई है, जबकि वह पत्र केवल परामर्शात्मक है और खुद केंद्र में भी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।
संघ ने समिति के कार्यक्षेत्र (Terms of Reference) पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इसमें संबंधित विभागों, अधिकारियों और अन्य हितधारकों से कोई व्यापक परामर्श नहीं लिया गया। इस वजह से पूरी प्रक्रिया एकतरफा प्रतीत होती है और इससे सचिवालय सेवा के अधिकारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। संघ का यह भी आरोप है कि कार्मिक विभाग ने बिना पारदर्शिता के समिति का गठन कर सरकार को गुमराह किया है।
सचिवालय सेवा संघ ने यह भी कहा कि झारखंड सचिवालय सेवा का गठन केंद्रीय सचिवालय सेवा के अनुरूप किया गया था और राज्य सरकार भी वेतन व सेवा शर्तों में केंद्र के अनुसार निर्णय लेती रही है। इसके बावजूद पद संरचना और प्रोन्नति के मामलों में राज्य स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। संघ के अनुसार, वर्ष 2018 से उप सचिव के 41 और संयुक्त सचिव के 24 अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव लंबित है, जिसे अब तक लागू नहीं किया गया है।
संघ ने सचिवालय सेवा में पदों की भारी कमी का भी मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिससे अधिकारियों के प्रमोशन पर असर पड़ रहा है। योग्य अधिकारियों को समय पर पदोन्नति नहीं मिल पा रही है, जिससे असंतोष और बढ़ रहा है। संघ ने कार्मिक विभाग पर प्रोन्नति प्रक्रिया को बाधित करने और सेवा के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
इसके अलावा संघ ने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा में पूछे गए सवालों के जवाब में विभाग ने वास्तविक स्थिति से अलग जानकारी दी है। इतना ही नहीं, न्यायालय के निर्देशों के बावजूद कई मामलों में उचित कार्रवाई नहीं की गई। संघ ने सरकार से मांग की है कि केंद्र की तृतीय कैडर रिव्यू कमेटी की सिफारिशों के आधार पर राज्य में पद संरचना को लागू किया जाए और वर्तमान समिति को भंग किया जाए।
फिलहाल सचिवालय सेवा संघ ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 28 अप्रैल को प्रस्तावित मानव श्रृंखला प्रदर्शन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और इसे सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी चल रही है। आने वाले दिनों में यह विरोध आंदोलन राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर असर डाल सकता है।


