Khunti: अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले शहीदों की धरती मुरहू प्रखंड का जिऊरी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। यह वही गांव है जहां भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के दौरान तीन महिलाएं शहीद हुई थीं। इसी कारण इस गांव को शहीदों का गांव कहा जाता है, लेकिन आज यहां की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 
गांव में आंगनबाड़ी केंद्र के लिए अब तक अपना भवन नहीं बन सका है। केंद्र कभी किराए के मकान में तो कभी जर्जर विद्यालय भवन के टूटे छत के नीचे संचालित किया जाता है। हालात इतने खराब हैं कि बच्चों के लिए बनने वाला पोषाहार भी खुले आसमान के नीचे तैयार किया जाता है, जिससे स्वच्छता और गुणवत्ता दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्राम प्रधान बिनसाय मुंडा ने बताया कि वर्ष 2010 से ही आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को आवेदन दिया जा रहा है। ग्राम सभा द्वारा जमीन भी चिन्हित कर दी गई है, लेकिन आज तक कोई पहल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि गांव में सामुदायिक भवन का भी अभाव है, जिसके कारण ग्रामीणों को हर तरह के कार्यक्रम और बैठकों के लिए खुले में ही एकत्र होना पड़ता है। 
आंगनबाड़ी सेविका चिंता मुंडू ने बताया कि केंद्र की शुरुआत से ही भवन की समस्या बनी हुई है। कभी किराए के मकान में तो कभी विद्यालय के जर्जर भवन में केंद्र चलाना पड़ता है। वर्तमान में जिस मकान में केंद्र संचालित हो रहा है, उसके मालिक ने अब मकान खाली करने को कह दिया है। उन्होंने बताया कि पहले एक हजार रुपये प्रतिमाह किराया तय हुआ था, लेकिन अब विभाग की ओर से मात्र दो सौ रुपये देने की बात कही जा रही है, जिससे मकान मालिक असहमत है। 
ऐसे में एक बार फिर आंगनबाड़ी केंद्र के संचालन पर संकट गहरा गया है। सेविका के सामने केंद्र को स्थानांतरित करने की चुनौती है, जिससे बच्चों के पोषण और शिक्षा पर असर पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शहीदों के इस गांव की अनदेखी बंद की जाए और जल्द से जल्द आंगनबाड़ी भवन, सामुदायिक भवन सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि गांव का समुचित विकास हो सके और शहीदों के बलिदान का सम्मान कायम रह सके।



