New Delhi : जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल Pahalgam में हुए भीषण आतंकी हमले की आज पहली बरसी पर पूरा देश शोक और संकल्प के साथ पीड़ितों को याद कर रहा है। 22 अप्रैल 2025 को हुए इस दिल दहला देने वाले हमले ने पूरे भारत को झकझोर कर रख दिया था, जब निर्दोष पर्यटकों को धर्म के आधार पर निशाना बनाकर उनकी निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस त्रासदी की याद में आज देशभर में श्रद्धांजलि दी जा रही है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस अवसर पर पीड़ितों को याद करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह हमला केवल निर्दोष लोगों पर नहीं, बल्कि देश की आत्मा पर भी हमला था। अपने संदेश में उन्होंने दोहराया कि भारत किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद के सामने झुकने वाला नहीं है और आतंकियों के मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले लोगों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पीड़ित परिवारों के साथ अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में पूरा देश उनके साथ खड़ा है और राष्ट्रीय एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
इस हमले के बाद भारतीय सेना ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए Operation Sindoor और Operation Mahadev जैसे अभियानों को अंजाम दिया। इन अभियानों के तहत कठिन हिमालयी क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया और हमले में शामिल प्रमुख आतंकियों को मार गिराया गया। सेना ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि देश के खिलाफ किसी भी साजिश का करारा जवाब दिया जाएगा।
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने भी इस अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि भारत इन घावों को कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने दोहराया कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद का भारत ने वर्षों से सामना किया है, लेकिन अब देश की प्रतिक्रिया पहले से कहीं अधिक मजबूत और निर्णायक हो चुकी है।

वहीं केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी पीड़ितों को याद करते हुए कहा कि यह हमला मानवता पर हमला था। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पूरे देश को एकजुट रहना होगा और भारत अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर कायम रहेगा। उनके अनुसार आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

यह हमला The Resistance Front द्वारा किया गया था, जिसे पाकिस्तान स्थित Lashkar-e-Taiba का सहयोग प्राप्त माना जाता है। हमलावरों ने पर्यटकों से उनका धर्म पूछकर उन्हें अलग किया और गैर-मुस्लिम पहचान होने पर उन्हें गोली मार दी। इस अमानवीय कृत्य में 26 लोगों की जान चली गई, जिनमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय व्यक्ति शामिल था, जिसने दूसरों को बचाने की कोशिश की थी।
पहलगाम हमले की यह बरसी केवल शोक का दिन नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के अडिग संकल्प का प्रतीक भी बन गई है। देश आज एकजुट होकर यह संदेश दे रहा है कि निर्दोषों के खून का हिसाब जरूर लिया जाएगा और राष्ट्र की एकता व अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।



