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कोडरमा में हाथियों का तांडव: ईंट भट्ठे पर हमला, दो की दर्दनाक मौत, तीन घायल—इलाके में दहशत का माहौल

Koderma: झारखंड के Koderma जिले में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा घटना जयनगर थाना क्षेत्र के कंझियाडीह गांव की है, जहां बीती रात हाथियों के झुंड ने एक ईंट भट्ठे पर हमला कर दिया। इस हमले में एक मजदूर और एक मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है।

मृतकों की पहचान बिहार के फतेहपुर गांव निवासी 32 वर्षीय राजकुमार मांझी और 12 वर्षीय लवकुश मांझी के रूप में हुई है। दोनों ईंट भट्ठे पर काम कर रहे थे और रात के समय अपने अस्थायी घर में थे। हाथियों के अचानक हमले ने उन्हें संभलने का मौका तक नहीं दिया और दोनों को कुचलकर मार डाला गया।

घटना में तीन लोग घायल भी हुए हैं, जिनमें राजकुमार मांझी की पत्नी गौरी देवी, लवकुश मांझी की मां कारी देवी और उनका डेढ़ वर्षीय बच्चा शामिल है। सभी घायलों का इलाज चल रहा है। खास बात यह है कि घायल हुए लोगों में एक छोटा बच्चा भी है, जिससे घटना की गंभीरता और बढ़ जाती है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात में हाथियों का झुंड अचानक भट्ठे पर पहुंचा और वहां बने मिट्टी के घरों को तोड़ना शुरू कर दिया। मजदूर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इसी अफरातफरी में एक छोटा बच्चा झोपड़ी में फंस गया, जिसे बचाने की कोशिश में हाथियों ने हमला कर दिया। वहीं 12 वर्षीय लवकुश भागते-भागते हाथियों के बीच जा पहुंचा, जहां उसे बेरहमी से पटक-पटक कर मार डाला गया।

बताया जा रहा है कि हाथियों ने इतनी हिंसक तरीके से हमला किया कि बच्चे का शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया। इस भयावह घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और लोगों में वन विभाग के प्रति गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले करीब एक महीने में हाथियों के हमले में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि आधा दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इससे साफ है कि यह समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है और स्थानीय लोगों की सुरक्षा खतरे में है।

वन विभाग की टीम हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन झुंड बार-बार रिहायशी इलाकों में लौट आता है। दिन में हाथी जंगलों में रहते हैं, जबकि रात के समय गांवों में घुसकर नुकसान पहुंचाते हैं। इससे लोगों की रातों की नींद उड़ गई है और वे लगातार डर के साये में जी रहे हैं।

डीएफओ Soumitra Shukla ने बताया कि हाथियों को नियंत्रित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं और पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ टीम भी बुलाई गई है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे जंगल के इलाकों से दूर रहें, हाथियों के पास न जाएं और कुछ दिनों तक खुले में सोने से बचें, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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