Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने रविवार को असम के टिंगखोंग विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की मांग को जोरदार रूप से उठाया। उन्होंने कहा कि असम के चाय बागानों में पीढ़ियों से रहने वाले आदिवासी समाज को आज तक एसटी (अनुसूचित जनजाति) का संवैधानिक दर्जा नहीं मिला, जो केवल सामान्य चूक नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर का अन्याय है।
हेमंत सोरेन ने कहा कि ब्रिटिश काल में अंग्रेजों ने इन लोगों को उनके घरों से दूर लाकर असम की मिट्टी से बांधा, और उन्होंने अपनी मेहनत से असम की अर्थव्यवस्था खड़ी की। इसके बावजूद आज तक उनके अस्तित्व और अधिकारों को मान्यता नहीं दी गई। उन्होंने इसे इतिहास में कभी माफ न होने वाला अन्याय बताया।
मुख्यमंत्री ने इस अन्याय को राजनीति से ऊपर का मुद्दा बताते हुए कहा कि यह सिर्फ अधिकार का सवाल नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और पहचान का सवाल है। उनका कहना था कि आदिवासी समाज का दर्द दशकों तक सरकारों और नेतृत्व बदलने के बावजूद कम नहीं हुआ, और सत्ता में रह चुकी पार्टियों ने इसे अपनी प्राथमिकता नहीं बनाया।
हेमंत सोरेन ने चेतावनी दी कि जब तक असम के आदिवासी समाज को उनका संवैधानिक अधिकार नहीं मिलेगा, लोकतंत्र भी अधूरा रहेगा। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि देश इस अन्याय को स्वीकार करे और उसे ठीक करे, ताकि पीड़ित समाज को उसका न्याय और पहचान मिल सके।
इस चुनावी सभा में हेमंत सोरेन ने झामुमो उम्मीदवार महावीर बास्के के लिए वोट भी मांगे। उन्होंने कहा कि टिंगखोंग के लोगों को तीर-धनुष प्रतीक के साथ झामुमो उम्मीदवार को भारी मतों से विजयी बनाना चाहिए, जैसे अन्य विधानसभा क्षेत्रों में आदिवासी और पिछड़ा समाज ने समर्थन दिखाया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि विरोधी द्वारा आदिवासी समाज को डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अब यह संभव नहीं है। असम का शोषित और वंचित आदिवासी समाज एकजुट हो चुका है और वह लड़कर अपना हक और अधिकार लेकर रहेगा।
उन्होंने सभा में उपस्थित जनता से आग्रह किया कि वे अपने वोट से न्याय सुनिश्चित करें और उन लोगों को सत्ता में पहुंचाएं जो उनके अधिकारों की रक्षा करेंगे। हेमंत सोरेन ने यह स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज अब और इंतजार नहीं करेगा, और न्याय दिलाने के लिए वह पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।


