Palamu: झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर प्रखंड में ‘हर घर नल से जल’ का सपना अधूरा रह गया है। 56 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई जल जीवन मिशन योजना तय समय सीमा 2025 बीत जाने के बावजूद अब तक केवल 15 प्रतिशत ही पूरी हो सकी है। इसका सीधा असर 49 गांवों के हजारों ग्रामीणों पर पड़ा है, जो आज भी पानी के लिए तरस रहे हैं।
इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य सोन नदी से पानी लाकर विभिन्न गांवों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई जगहों पर पानी की टंकियां अधूरी खड़ी हैं और पाइपलाइन बिछाने का काम भी अधूरा पड़ा हुआ है। ग्रामीणों के लिए यह योजना अब उम्मीद से ज्यादा निराशा का कारण बन गई है।
जानकारी के मुताबिक, योजना के शुरुआती चरण में संवेदक को लगभग 6 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया गया था। इसके बाद विभाग की ओर से भुगतान रोक दिया गया, जिससे काम की गति धीमी पड़ गई और अंततः करीब दो वर्षों तक पूरी परियोजना ठप हो गई।
हालांकि, हाल के दिनों में पाइपलाइन बिछाने का काम दोबारा शुरू हुआ है, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी है और समय पर पूरा होने को लेकर अब भी संशय बना हुआ है। अधिकारी भी यह मान रहे हैं कि भुगतान में देरी इस परियोजना की सबसे बड़ी बाधा रही है।
योजना के तहत कोइरियाडीह, बहेरा, काजीनगर, पतरिया और सड़या सहित 49 गांवों में जल आपूर्ति के लिए सात लाख लीटर क्षमता की पानी टंकियों का निर्माण होना था। लेकिन अधिकांश टंकियां अभी तक अधूरी हैं। साथ ही, ट्रीटमेंट प्लांट के स्थान में बदलाव और विभागीय समन्वय की कमी ने भी कार्य में देरी की।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह योजना शुरू से ही विवादों में रही। परता पंचायत के पंसस गुप्तेश्वर पांडेय ने बताया कि पहले ट्रीटमेंट प्लांट परता में प्रस्तावित था, जिसे बाद में देवरी शिफ्ट कर दिया गया। वहीं, कोइरियाडीह में श्मशान भूमि पर टंकी निर्माण को लेकर भी विवाद हुआ, जिससे काम प्रभावित हुआ।
गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत झेल रहे ग्रामीणों के लिए यह योजना राहत बन सकती थी, लेकिन अधूरी परियोजना अब उनके लिए एक बोझ बन गई है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के जेई वीरेंद्र कुमार ने बताया कि काम दोबारा शुरू हो गया है और जल्द इसे पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों को अब भी पूरी योजना के धरातल पर उतरने का इंतजार है।



