Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष हेमंत सोरेन असम में चुनाव प्रचार के दौरान आदिवासी चाय बागान श्रमिकों की दयनीय स्थिति देखकर भावुक हो गए। सोमवार को उन्होंने चाय बागान श्रमिकों के आवासों का निरीक्षण किया और सरकार की उपेक्षा पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि असम का यह चुनाव सिर्फ सामान्य चुनाव नहीं है, बल्कि यह पहचान, आवास, जमीन और अन्य अधिकारों के लिए संघर्ष की शुरुआत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस तरह के घरों में आदिवासी भाई-बहन रहने को विवश हैं, वह अक्षम्य है और यह यहां की सरकारों द्वारा किया गया गंभीर अपराध है।
उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि झारखंड में तीन कमरे का आवास गरीब लोगों को दिया जा सकता है और 50 लाख महिलाओं को 2,500 रुपये प्रति माह सम्मान राशि दी जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि असम में यह क्यों नहीं किया जा सकता। हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि असम की सभी सरकारों ने बारी-बारी से आदिवासियों को ठगा है और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा है।
सीएम ने स्पष्ट किया कि अब यह अन्याय नहीं चलेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि झामुमो और उनके सहयोगी नेताओं के नेतृत्व में आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी और उनकी मूलभूत जरूरतों की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
हेमंत सोरेन सोमवार को टिपलिंक टी एस्टेट, लेन नंबर सात में आयोजित दुलियाजान विधानसभा प्रत्याशी पीटर मिंज के समर्थन में लोगों से वोट की अपील करने भी पहुंचे। मौके पर उन्होंने चाय बागान में काम कर रहे आदिवासी श्रमिकों से उनकी समस्याओं के बारे में सीधे बातचीत की।
उन्होंने श्रमिकों के घरों का मुआयना किया और घरों की खराब स्थिति देखकर गहरी चिंता जताई। उनके अनुसार, यह स्थिति केवल असम की सरकार की उपेक्षा का परिणाम है, जिसे अब बदलना जरूरी है।
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि झामुमो का प्रयास है कि सभी आदिवासी अपने अधिकारों के साथ सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकें। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे दुलियाजान विधानसभा में सही विकल्प चुनकर अपने भविष्य और अधिकारों के लिए वोट दें।



