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दीपांकर भट्टाचार्य का केंद्र सरकार पर जुबानी हमला: युद्ध में फंसे भारतीय मजदूर, आर्थिक संकट और चुनाव रणनीति पर भाकपा माले की स्पष्ट बातें

Dhanbad: निरसा में भाकपा (माले) की दो दिवसीय राज्य कमेटी बैठक में पार्टी के शीर्ष नेताओं ने केंद्र सरकार की विदेश नीति, मजदूरों की सुरक्षा और देश के बढ़ते आर्थिक संकट को लेकर जमकर निशाना साधा। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मामलों पर कई गंभीर मुद्दे उठाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला।

बैठक में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। निरसा स्थित भाकपा माले कार्यालय में आयोजित इस बैठक में राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, प्रदेश सचिव मनोज भट्ट, निरसा विधायक अरूप चटर्जी, बगोदर के पूर्व विधायक बिनोद सिंह, माले नेता हालधर महतो, राज्य कमिटी सदस्य सुषमा मेहता और सभा प्रभारी जनार्दन प्रसाद सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे। बैठक में देश की राजनीतिक, सामाजिक और संगठनात्मक मजबूती पर विस्तार से चर्चा हुई।

दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि इजरायल और ईरान के बीच युद्ध से पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत को इस युद्ध के खिलाफ खुलकर अमेरिका और इजरायल से अपील करनी चाहिए। उनका आरोप था कि केंद्र सरकार प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर उदासीन बनी हुई है।

भट्टाचार्य ने बताया कि करीब एक करोड़ भारतीय मजदूर ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं, जिनमें से कई फंसे हुए हैं और कुछ की मौत की खबरें भी सामने आई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले इजरायल दौरे में प्रधानमंत्री ने अगले पांच वर्षों में 50 हजार मजदूर भेजने का वादा किया था, लेकिन सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से निभाई नहीं गई।

देश में आर्थिक हालात को लेकर भट्टाचार्य ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रसोई गैस की किल्लत, छोटे उद्योगों की बंदिश और मजदूर वर्ग की परेशानियों से स्थिति कोरोना काल जैसी बनती जा रही है। उन्होंने चार नए लेबर कोड को मजदूरों के लिए ‘गुलामी का कानून’ करार दिया।

आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सीपीएम नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट के साथ माले 10 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। असम में कांग्रेस और लेफ्ट के साथ गठबंधन में चाय बागान क्षेत्र की एक सीट, मेहाली और पहाड़ी जिलों की दो सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना है। मेहाली सीट पर झामुमो का भी समर्थन मिल रहा है।

इसके अलावा तमिलनाडु में माले 14 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और जिन सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी, वहां डीएमके को समर्थन देगी। केरल में तीन सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी है।

कुल मिलाकर, निरसा में आयोजित राज्य कमेटी बैठक में भाकपा माले ने केंद्र सरकार की विदेश नीति, मजदूर सुरक्षा और आर्थिक हालात पर सवाल उठाए, साथ ही आगामी चुनावों में अपनी रणनीति और गठबंधन स्पष्ट रूप से पेश किए।

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