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झारखंड विधानसभा बजट सत्र 2026-27 रहा ऐतिहासिक: रिकॉर्ड कार्य, बड़े विधेयक पारित, समापन पर नेताओं ने रखी अपनी-अपनी बात

Ranchi: रांची में संपन्न हुआ झारखंड विधानसभा का बजट सत्र 2026-27 कई मायनों में अहम और ऐतिहासिक माना जा रहा है। 18 फरवरी से शुरू होकर 18 मार्च तक चले इस सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बहस, सवाल-जवाब और विधायी कार्यों की व्यापक झलक देखने को मिली।

विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने समापन भाषण में बताया कि इस सत्र में कुल 242 अल्पसूचित प्रश्न स्वीकृत हुए, जिनमें से 62 के उत्तर दिए गए। वहीं 758 तारांकित प्रश्नों में से 57 का जवाब सदन में दिया गया। इसके अलावा 72 ध्यानाकर्षण सूचनाओं में से 55 पर चर्चा हुई और 400 शून्यकाल सूचनाएं स्वीकृत की गईं।

कार्यकाल की दृष्टि से भी यह सत्र उल्लेखनीय रहा। निर्धारित 66 घंटे के मुकाबले सदन ने लगभग 74 घंटे काम किया, जो 112 प्रतिशत कार्यक्षमता को दर्शाता है। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड माना जा रहा है।

इस सत्र में दो महत्वपूर्ण वित्तीय विधेयक पारित किए गए, जिनमें वित्तीय वर्ष 2025-26 का तृतीय अनुपूरक बजट और 2026-27 का वार्षिक बजट शामिल है। इनकी कुल राशि 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपये रही, जो राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इसके साथ ही झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2026 भी पारित किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य के विश्वविद्यालयों को एक समान ढांचे में लाकर उनकी कार्यप्रणाली को पारदर्शी और प्रभावी बनाना है, जिससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

सत्र की एक खास उपलब्धि NEVA (ई-विधान) पोर्टल का सफल उपयोग रहा। इसके माध्यम से विधायकों ने घर बैठे शून्यकाल सूचनाएं दर्ज कीं और कार्यसूची भी ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई, जिससे कार्यप्रणाली अधिक डिजिटल और सुगम बनी।

संसदीय कार्य सह वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस सत्र को पिछले 15 वर्षों में सबसे शांतिपूर्ण और सफल बताया। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने मिलकर सदन को सुचारू रूप से चलाया और जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई।

वहीं भाजपा विधायक सीपी सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अधिकारियों द्वारा मंत्रियों को सही जानकारी नहीं दी जा रही है। उन्होंने यह भी मांग की कि विधानसभा की कार्यवाही साल में कम से कम 60 दिनों तक चलनी चाहिए, ताकि जन मुद्दों पर बेहतर चर्चा हो सके।

समापन के मौके पर यह स्पष्ट हुआ कि यह बजट सत्र केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राज्य के विकास, नीति निर्माण और जनहित के मुद्दों पर गंभीर विमर्श का मंच साबित हुआ।

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