Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान संथाल परगना में आदिवासियों की जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण का मामला जोरदार तरीके से उठा। प्रश्नकाल में जरमुंडी से भाजपा विधायक देवेंद्र कुंवर ने आरोप लगाया कि संथाल परगना टिनेंसी एक्ट (SPT Act) के स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद आदिवासी जमीन का डीसी की पूर्व अनुमति के बिना हस्तांतरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियमों के खुले उल्लंघन के कारण क्षेत्र की डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
विधायक ने सदन में कहा कि कानून के अनुसार आदिवासी जमीन का हस्तांतरण उपायुक्त (डीसी) की अनुमति के बिना संभव नहीं है, फिर भी पूरे प्रमंडल में इस नियम की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने इसे गंभीर विषय बताते हुए सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की।
इस पर विभागीय मंत्री दीपक बिरुवा ने जवाब देते हुए कहा कि एसपीटी एक्ट में अवैध हस्तांतरण की स्थिति में बेदखली और कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान है। यदि किसी विशिष्ट मामले की जानकारी विधायक द्वारा दी जाती है तो संबंधित कमिश्नर को जांच कर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि कानून के तहत दोषियों के खिलाफ कार्रवाई संभव है।
चर्चा के दौरान विधायक देवेंद्र कुंवर ने यह भी आरोप लगाया कि संथाल क्षेत्र के कई जिलों में बाहरी लोगों, खासकर बांग्लादेशी नागरिकों की बसावट तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे लोग खुलेआम कारोबार कर रहे हैं और प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा। दुमका जिले का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
सदन की कार्यवाही के दौरान विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने कहा कि यदि विधायक के पास अवैध जमीन हस्तांतरण से संबंधित कोई ठोस जानकारी या दस्तावेज हैं तो उन्हें लिखित रूप में मंत्री को उपलब्ध कराएं, ताकि नियमानुसार जांच और कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इस मुद्दे पर सदन में हुई चर्चा ने संथाल परगना क्षेत्र में जमीन सुरक्षा और कानून के अनुपालन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।


