Ranchi: हजारीबाग के चुरचू प्रखंड में हाथियों के झुंड द्वारा सात लोगों की मौत की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री Hemant Soren ने वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसी भी हाल में हाथियों के हमलों से किसी व्यक्ति की जान नहीं जाए।
बैठक में शामिल अधिकारी और चर्चा
मुख्यमंत्री के आवास कांके रोड में हुई बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, पीसीसीएफ (हॉफ) संजीव कुमार, पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) रवि रंजन, सीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) एसआर नाटेश, आरसीएफ हजारीबाग आरएन मिश्रा और आरसीएफ बोकारो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया। ग्रामीणों को मशाल, टॉर्च, डीजल, टायर और सोलर सायरन जैसे साधन उपलब्ध कराने के साथ हाथी भगाने और बचाव के प्रशिक्षण दिए जाने की बात कही।

हाथियों के हमलों की स्थिति और रोकथाम
सीएम ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला और दुमका में हाथियों के हमलों से लगभग 27 लोगों की मौत हुई है। वन विभाग ने बताया कि हजारीबाग क्षेत्र में पांच एग्रेसिव हाथियों का झुंड सक्रिय है। इन घटनाओं को रोकने के लिए 70 लोगों की टीम अलर्ट मोड पर कार्यरत है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पिछले पांच वर्षों में हुई घटनाओं, जान-माल की हानि और मुआवजा राशि का डेटा उपलब्ध कराने को कहा। सभी एलिफेंट कॉरिडोर की मैपिंग और पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बेहतर मैकेनिज्म की तैयारी
हाथियों के विचलन को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने वन विभाग से क्विक रिस्पॉन्स मैकेनिज्म तैयार करने और छह कुनकी हाथियों की मदद से ट्रैकिंग सिस्टम मजबूत करने की योजना तैयार करने को कहा। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हाथियों से होने वाले हमलों की रोकथाम और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन विभाग के अधिकारियों को चेतावनी दी कि हाथियों के हमलों से किसी भी नागरिक की जान नहीं जानी चाहिए और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा तुरंत उपलब्ध कराया जाए।



