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सारंडा में एनकाउंटर: झारखंड पुलिस–CRPF के संयुक्त अभियान ‘मेगाबुरू’ में ऐतिहासिक सफलता, अनल समेत 15 नक्सली ढेर

Ranchi : झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को बड़ी कामयाबी मिली है। झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के संयुक्त विशेष अभियान ‘मेगाबुरू’ के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में हुई मुठभेड़ में 15 नक्सलियों को मार गिराया गया है। मारे गए नक्सलियों में एक करोड़ का इनामी शीर्ष माओवादी नेता अनल उर्फ पतिराम मांझी भी शामिल है। यह कार्रवाई राज्य में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

सुबह से चली भीषण मुठभेड़

आईजी CRPF साकेत सिंह ने बताया कि किरीबुरू थाना क्षेत्र के अंतर्गत गुरुवार सुबह करीब 6:30 बजे सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। इस संयुक्त ऑपरेशन में 209 कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर, CRPF और जिला पुलिस बल शामिल थे। नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से अंधाधुंध फायरिंग की, लेकिन जवानों ने रणनीतिक तरीके से जवाबी कार्रवाई की।

15 नक्सलियों के शव बरामद, हथियार भी जब्त

मुठभेड़ के बाद अब तक 15 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। साथ ही भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और दैनिक उपयोग की सामग्री भी जब्त की गई है। ऑपरेशन के दौरान इलाके में सर्च अभियान जारी है ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

13 नक्सलियों की पहचान, अनल सबसे बड़ा नाम

प्रारंभिक जांच में मारे गए 15 में से 13 नक्सलियों की पहचान कर ली गई है। इनमें अधिकांश उच्च इनामी उग्रवादी हैं। सबसे प्रमुख नाम अनल उर्फ पतिराम मांझी (CCM) का है, जिस पर झारखंड में 1 करोड़ रुपये, ओडिशा में 1 करोड़ 20 लाख रुपये और एनआईए द्वारा 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। अनल के खिलाफ कुल 149 आपराधिक मामले दर्ज थे।

सारंडा में हिंसा का मास्टरमाइंड था अनल

अनल उर्फ पतिराम मांझी गिरिडीह जिले का निवासी था और लंबे समय से सारंडा के घने जंगलों में छिपकर माओवादी गतिविधियों को संचालित कर रहा था। वह CPI (माओवादी) की झारखंड-बिहार स्पेशल एरिया कमेटी का सदस्य और संगठन का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था। वर्ष 2022 के बाद से सारंडा क्षेत्र में हुए कई विस्फोटों और सुरक्षा बलों पर हमलों में उसकी अहम भूमिका रही है।

नक्सलवाद की आखिरी मजबूत चौकी बना सारंडा

सारंडा जंगल झारखंड में नक्सलवाद की अंतिम और सबसे मजबूत चौकी माना जाता है। बीते तीन वर्षों से यहां सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच लगातार संघर्ष जारी है। हालांकि, सुरक्षा कैंपों की स्थापना, बेहतर खुफिया तंत्र और लगातार संयुक्त अभियानों के कारण नक्सलियों की गतिविधियां अब काफी सीमित हो गई हैं। फिलहाल क्षेत्र में मिसिर बेसरा जैसे कुछ शीर्ष नक्सली ही सक्रिय बताए जाते हैं।

2025-26 में नक्सल उन्मूलन का लक्ष्य

झारखंड पुलिस ने मार्च 2026 तक राज्य से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। वर्ष 2025 में अब तक कई नक्सली मारे गए हैं और बड़ी संख्या में उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण भी किया है। सुरक्षाबलों की बढ़ती मौजूदगी से नक्सलियों की सप्लाई लाइन और आवाजाही पर गहरा असर पड़ा है।

पुलिस की अपील: आत्मसमर्पण करें नक्सली

इस बड़ी सफलता के बाद झारखंड पुलिस ने बचे हुए नक्सलियों से आत्मसमर्पण कर राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन नक्सली संगठन की रीढ़ तोड़ने वाला साबित होगा। अभियान समाप्त होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

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