Chaibasa: झारखंड के चाईबासा जिले में एक दंतैल जंगली हाथी लोगों के लिए काल बन गया है। बीते दस दिनों में इस हाथी ने 22 लोगों की जान ले ली, लेकिन वन विभाग और जिला प्रशासन अब तक इसे काबू में करने में सफल नहीं हो पाए हैं। लगातार अपीलों के बावजूद दहशत का माहौल बना हुआ है और ग्रामीण भय के साये में जीने को मजबूर हैं।
ट्रेंकुलाइज के तीन प्रयास विफल, ओडिशा से भी लौटा हाथी
वन विभाग ने इस खूंखार हाथी को बेहोश करने (ट्रेंकुलाइज) के तीन प्रयास किए, लेकिन हर बार असफलता हाथ लगी। शुक्रवार देर शाम घंटों की मशक्कत के बाद हाथी को ओडिशा के जंगलों की ओर खदेड़ा गया, लेकिन सुरक्षा कारणों से ओडिशा वन विभाग ने उसे वापस झारखंड की सीमा में धकेल दिया। देर रात हाथी के फिर से चाईबासा में प्रवेश करने की पुष्टि हुई, जिसके बाद वन विभाग की टीमें सर्च ऑपरेशन में जुट गई हैं।
रेस्क्यू टीम पर हमला, एक विशेषज्ञ की मौत
हाथी को काबू में करने के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और गुजरात से ‘तारा रेस्क्यू टीम’ को बुलाया गया था। आधुनिक संसाधनों से लैस इस टीम पर रेस्क्यू के दौरान हाथी ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में टीम का एक विशेषज्ञ गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना ने स्थिति की गंभीरता और बढ़ा दी है।
1 जनवरी से लगातार कहर, गांव-दर-गांव मौतें
यह गुस्सैल हाथी 1 जनवरी से लगातार लोगों पर हमला कर रहा है। टोंटो प्रखंड के बांडीझारी गांव, बिरसिंहहातु, रोरो, बड़ा पासीया, लांपाईसाई और हाटगम्हरिया क्षेत्र में कई लोगों को इस हाथी ने रौंदकर मार डाला। 6 जनवरी की रात नोवामुंडी के बाबरिया गांव में हाथी ने एक ही परिवार के पांच लोगों की जान ले ली, जिनमें पति-पत्नी और दो मासूम बच्चे शामिल थे।

तेजी से बदल रहा ठिकाना, ट्रैक करना चुनौती
वन अधिकारियों के अनुसार यह हाथी प्रतिदिन करीब 30 किलोमीटर की दूरी तय कर रहा है, जिससे इसकी सटीक लोकेशन ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो गया है। डीएफओ आदित्य नारायण ने बताया कि हाथी के दोबारा झारखंड में प्रवेश की पुष्टि हो चुकी है और उसे ट्रेंकुलाइज करने का प्रयास फिर से किया जाएगा। ग्रामीणों को जंगलों से दूर रहने और सतर्क रहने की सख्त हिदायत दी गई है।
वनतारा और अन्य विशेषज्ञ टीमों से मदद की पहल
हाथी की आक्रामकता को देखते हुए वन विभाग ने पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञों की टीम के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण संगठन ‘वनतारा’ से भी संपर्क किया है। अधिकारियों का कहना है कि विशेषज्ञ टीम के पहुंचते ही आगे की कार्रवाई तेज की जाएगी।
क्यों इतना आक्रामक है यह हाथी?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह हाथी अपने झुंड से बिछड़ गया है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह हाथी मस्टह अवस्था में है, जिसमें हार्मोनल बदलाव के कारण नर हाथी बेहद आक्रामक हो जाते हैं। वहीं कुछ का कहना है कि झुंड से अलग होने और दोबारा अपने परिवार से मिलने की बेचैनी के कारण इसका व्यवहार हिंसक हो गया है।
झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष के भयावह आंकड़े
चाईबासा की घटना कोई अकेला मामला नहीं है। झारखंड में बीते 18 वर्षों में हाथियों के हमलों में करीब 1250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 150 हाथियों की भी जान गई है। वन विभाग के अनुसार राज्य में फिलहाल 550 से 600 हाथी मौजूद हैं, जो अक्सर जंगल से सटे आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों के क्षरण, पारंपरिक हाथी गलियारों में मानवीय दखल और भोजन-पानी की कमी के कारण हाथी आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि मानव और हाथियों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है, और चाईबासा की मौजूदा स्थिति इसका सबसे भयावह उदाहरण बन चुकी है।



