Chaibasa: पश्चिम सिंहभूम जिले के बंदगांव प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत घने नक्सल प्रभावित और बीहड़ जंगल क्षेत्र चम्पावा पंचायत भवन में शनिवार को एक विशेष कम्बल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मुखिया कानू तैसुन, पंसस फुलमुनी मुंडरी और पंचायत सचिव पूजा कुमारी ने 150 जरूरतमंद गरीब और असहाय लोगों को कम्बल वितरित किए। जबकि इस क्षेत्र के लिये अभी बड़ी संख्या में कंबल की जरूरी है क्योंकि कई ऐसे जरूरतमंद बुजुर्ग सहित अन्य लोगों को कंबल की पूर्ति नहीं की जा सकी।

मुखिया कानू तैसुन ने अपने संबोधन में कहा कि, “हमारी पूरी कोशिश है कि इन जंगल क्षेत्रों में रहने वाले गरीब व्यक्तियों को ठंड से बचने के लिए कम्बल मिले। चम्पावा पंचायत के सभी गांव जंगलों के बीच स्थित हैं, जहां ठंड का असर बहुत अधिक होता है। विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में यहां ठंड से कई लोग बीमार हो जाते हैं और दुर्भाग्यवश कुछ लोग तो अपनी जान भी गंवा देते हैं। इसलिए, समय रहते इन लोगों तक कम्बल पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि, हम सरकार से अपील करते हैं कि इस क्षेत्र में और अधिक कंबल उपलब्ध कराए जाएं, ताकि अधिक से अधिक गरीबों की मदद की जा सके।
पंसस फुलमुनी मुंडरी ने भी कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए कहा कि, यह कंबल वितरण झारखंड सरकार के सौजन्य से किया गया है। आज हम उन गरीब, असहाय और विकलांग लोगों को कंबल प्रदान कर रहे हैं, जिन्हें सर्दी से बचने के लिए इसकी सख्त जरूरत थी। जिन लोगों को कंबल नहीं मिल पाया, उन्हें भी जल्द ही सरकार की मदद से कंबल वितरित किया जाएगा। हमारा मुख्य उद्देश्य यह है कि जिनका भी घर जंगल क्षेत्र में है और जो किसी भी कारण से बेसहारा हैं, उन्हें इस ठंड से बचाने के लिए कम्बल मिले।

पंचायत सचिव पूजा कुमारी ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से लोगों को सर्दी के मौसम में राहत मिलती है और उन्हें समाज की ओर से मदद का अहसास होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यों से जनता में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ता है और समाज में एकता का संदेश जाता है।
इस अवसर पर रोजगार सेवक सुनील सरदार, एतवा बोरजो, संजय कंडिर, श्याम पूर्ति समेत कई अन्य स्थानीय लोग भी मौजूद थे। सभी ने मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना सहयोग दिया।
यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, क्योंकि इन बीहड़ जंगलों में अक्सर राहत सामग्री नहीं पहुंच पाती है। कंबल वितरण से स्थानीय निवासियों को ठंड से राहत मिली और इस अभियान को व्यापक समर्थन मिला।



