Khunti: जहां एक ओर हम पेड़ बचाने की बात करते हैं, पेड़ों की संख्या बढ़ाने के लिये पौधारोपण करते हैं तो वहीं दूसरी ओर वर्षों पुराने पेड जो एक धरोहर स्वरूप है उस पर अत्याचार हो रहा है।

खूंटी वन प्रमंडल क्षेत्र में सड़क किनारे जितने भी बड़े बड़े पेड़ हैं उनमे से लगभग सभी पेड़ों पर निजी संस्थानो द्वारा अपने प्रचार प्रसार के लिये बड़ी बड़ी कीलें ठोककर कर बैनर और पोस्टर लगाया जा रहा है जिससे अबतक कई पेड़ सूखकर खत्म हो चुके हैं और कई पेड़ों की स्थिति खराब होता जा रहा है क्योंकि पेड़ों में कीलें ठोकने से उसमें सड़न की समस्या उत्पन्न होने लगती है जिससे अच्छे पेड़ भी मर जाते हैं, खूंटी रांची मुख्य सड़क पर काफी संख्या में यह समस्या देखने को मिल रहा है। 
निजी संस्थानो के प्रचार प्रसार का जरिया बन चुका सड़क किनारे का पेड़ धीरे धीरे एक एक कर मरने लगा है जिसका प्रमुख कारण है उनमें कीलें ठोकना। इस गंभीर विषय पर ना वन एवं पर्यावरण विभाग और न हीं सड़प परिवहन विभाग ध्यान दे रहा है। जबकि ऐसे गंभीर मामलों में सख्ती बरतने की जरूरत थी ताकि पर्यावरण को सुरक्षा प्रदान किया जा सके।
इन समस्याओं पर ध्यान नहीं देना विभागों की मिलीभगत को दर्शाती है क्योंकि बिना सहमति के कोई भी संस्थान ऐसे पेड़ों पर कीलें ठोककर उसे बर्बाद नहीं कर सकता है। वहीं दूसरी ओर बात करे तो हर वर्ष वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा लाखों रूपये खर्च कर के हजारों की संख्या में पौधारोपण किया जाता है ताकि पर्यावरण को स्वच्छ एवं सुंदर बनाया जा सके लेकिन पले बढ़े पेड़ों पर अत्याचार पर चुप्पी रखना मिलीभगत की ओर इशारा करता है।



