Ranchi: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के “हिसाब देने” वाले बयान पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) भड़क गया है। झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने मरांडी के बयान को झारखंड विरोधी करार देते हुए कहा कि क्या वे सीएजी बन गए हैं, जो राज्य सरकार उनसे या केंद्र सरकार से हिसाब दे?
सुप्रियो भट्टाचार्य ने सख्त लहजे में कहा कि झारखंड की वर्तमान सरकार—चाहे 14 महीने की रही हो या पिछले छह वर्षों से चल रही—उस पर वित्तीय अनियमितता का कोई ठोस आरोप नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं और इससे झारखंड की छवि को नुकसान पहुंचता है।
‘बाबूलाल मरांडी झारखंडी नहीं रहे’—झामुमो
झामुमो नेता ने कहा कि मरांडी का बयान गैर-जिम्मेदाराना है और ऐसा प्रतीत होता है कि वे झारखंड विरोधी रुख अपना चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे बयानों से पहले सोच-विचार जरूरी है।
बीजेपी का पलटवार: हिसाब देने में क्या दिक्कत?
वहीं बीजेपी की ओर से प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने मरांडी के बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार राज्य को धन देती है, तो उसका हिसाब मांगना स्वाभाविक है। उन्होंने सवाल किया कि क्या राज्य सरकार जिलों को राशि देती है तो उनसे हिसाब नहीं लेती? इसका जवाब झामुमो को देना चाहिए।
गौरतलब है कि गुरुवार को बाबूलाल मरांडी ने कहा था कि जब तक झारखंड सरकार केंद्र से मिली राशि का हिसाब नहीं देगी, तब तक केंद्र से आगे फंड नहीं मिलेगा। इसी बयान को लेकर सियासी तकरार तेज हो गई है।


