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Year Ender 2025 : झारखंड की राजनीति में उतार-चढ़ाव और प्रमुख टकराव

Ranchi : साल 2025 झारखंड की राजनीति के लिहाज से उतार-चढ़ाव भरा रहा। हेमंत सरकार के लिए सत्ता का साल अपेक्षाकृत सुकून भरा रहा, लेकिन विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार हमला किया। राज्य स्थापना दिवस जैसे आयोजनों ने एकता दिखाई, वहीं डीजीपी विवाद, बालू संकट, भर्ती घोटाले और केंद्र फंड विवाद ने सरकार की साख पर सवाल खड़ा किए। इस बीच ईडी और एसीबी की कार्रवाई भी राजनीतिक सुर्खियों में रही।

पार्टी नेतृत्व और प्रदेश अध्यक्ष बदलाव
विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद बाबूलाल मरांडी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहने को लेकर अटकलें तेज हुईं, लेकिन पार्टी ने उन्हें दोनों पदों पर बनाए रखा। वहीं अक्टूबर में रबीन्द्र कुमार राय को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष से हटाकर राज्य सभा सांसद आदित्य साहू को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।

रघुवर दास की सक्रिय वापसी
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर 10 जनवरी को भाजपा में वापसी की। इसके बाद वे प्रदेश के विभिन्न जिलों में सक्रिय रहे और हेमंत सरकार पर निशाना साधते रहे।

घाटशिला उपचुनाव और निकाय चुनाव
घाटशिला में झामुमो ने उपचुनाव में जीत दर्ज की। कोर्ट की फटकार के बाद ओबीसी आरक्षण के साथ निकाय चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

डीजीपी अनुराग गुप्ता विवाद
अप्रैल में सेवानिवृत्त अनुराग गुप्ता को दो साल का एक्सटेंशन दिया गया, जिसे केंद्र ने अ संवैधानिक बताया। बाबूलाल मरांडी ने इसे कोर्ट में चुनौती दी, जो सुप्रीम कोर्ट तक गई। विवाद नवंबर में उनके इस्तीफे के साथ समाप्त हुआ।

एसआईआर पर आदिवासी हितों की जंग

14 सितंबर को SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर सत्ता और विपक्ष में तीखी बहस हुई। आदिवासी विरोध और वोटर लिस्ट में हेरफेर के आरोप सामने आए।

कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक तनाव
सरहुल उत्सव के दौरान सिरमटोली सरना स्थल विवाद और हजारीबाग में धार्मिक जुलूस पर पथराव जैसी घटनाओं ने कानून व्यवस्था को चुनौती दी। कुड़मी आंदोलन और रेल टेका-दहर छेका आंदोलन आदिवासी और अन्य समुदायों के बीच टकराव का कारण बने।

गठबंधन कलह और बिहार का प्रभाव
बिहार चुनाव में झामुमो को इंडिया गठबंधन में शामिल नहीं किया गया, जिससे नाराजगी और समीकरणों की अटकलें तेज हुईं। कांग्रेस में भी आंतरिक कलह नजर आई।

आर्थिक संकट और सरकारी परियोजनाएं
राज्य की वित्तीय स्थिति विपक्ष के लिए चिंता का विषय रही। केंद्र फंड विवाद और योजनाओं की देरी उठाए गए। इसके बावजूद सरकार ने स्थापना दिवस के मौके पर कई परियोजनाएं लॉन्च की।

सरकारी नियुक्तियां और नौकरी का जोर
सरकार ने एक साल पूरे होने पर 8,792 अभ्यर्थियों को विभिन्न विभागों में नियुक्त किया। जेपीएससी और जेएसएससी में लंबित नौकरियों के दरवाजे खोले गए।

ईडी और एसीबी की कार्रवाई
भूमि और शराब घोटाले में एसीबी ने कई अधिकारियों को गिरफ्तार किया। ईडी ने अवैध कोयला कारोबारियों और प्रतिबंधित कफ सिरप मामले में छापेमारी की।

अवैध निर्माण पर प्रशासन की कार्रवाई
रिम्स परिसर में सात एकड़ जमीन पर अवैध निर्माण हटाया गया। दर्जनों कच्चे मकान ढहाए गए, जो झारखंड बनने के बाद पहली बड़ी कार्रवाई मानी गई।

धनबाद में धान खरीद और छात्रवृत्ति विवाद
धान खरीद और छात्रवृत्ति मामलों को लेकर सरकार विपक्ष के निशाने पर रही। शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड को 25 साल में कोई डरा नहीं सका और न ही डिगा सकता है।

साल 2025 में झारखंड की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर बहस और प्रशासनिक कार्रवाइयों ने मिलकर एक गतिशील और चुनौतीपूर्ण साल बनाया।

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