Jamshedpur: भारतीय जनता पार्टी, जमशेदपुर महानगर में लंबे समय से चल रही संगठनात्मक कवायद के बीच सोमवार को मंडल अध्यक्षों की घोषणा का आंशिक पटाक्षेप हुआ। पार्टी ने 28 मंडलों में से 17 मंडल अध्यक्षों के नामों की घोषणा कर दी है, जबकि 11 मंडलों के अध्यक्षों के नामों पर अभी सस्पेंस बना हुआ है।
साकची स्थित भाजपा जिला कार्यालय में जिला चुनाव अधिकारी मनोज सिंह और पर्यवेक्षक बिरंची नारायण ने घोषित मंडल अध्यक्षों की सूची जारी की। घोषणा के साथ ही कार्यालय में जश्न और निराशा—दोनों के दृश्य देखने को मिले। जिन कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी मिली, उनका समर्थकों ने फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया, वहीं कई दावेदार मायूस नजर आए।
महीनों से चल रही थी सियासी रस्साकशी
जमशेदपुर महानगर के मंडलों में अध्यक्ष पद के लिए पिछले कई महीनों से गुटबाजी और लॉबिंग चल रही थी। ‘ऑर्गेनाइजेशन पर्व’ के तहत हुई रायशुमारी में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने दावेदारी पेश की थी। घोषित सूची से संकेत मिलता है कि संगठन ने अनुभवी कार्यकर्ताओं और युवाओं के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।
11 मंडलों में क्यों अटका फैसला?
सूत्रों के अनुसार जिन 11 मंडलों के नामों की घोषणा नहीं हो सकी, वहां गुटीय समीकरण काफी उलझे हुए हैं। एक पद के लिए कई मजबूत दावेदार होने के कारण पर्यवेक्षकों को सहमति बनाने में कठिनाई आ रही है। इन्हीं कारणों से इन मंडलों पर अंतिम फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि जल्द ही इन पर भी निर्णय लिया जाएगा।
पद नहीं, जिम्मेदारी का ताज
महानगर अध्यक्ष सुधांशु ओझा ने नवनियुक्त मंडल अध्यक्षों को बधाई देते हुए कहा कि यह पद सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई टीम संगठन को मजबूत करेगी, जनमुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाएगी और पार्टी की विचारधारा को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएगी।
फिलहाल सभी की निगाहें शेष 11 मंडलों पर टिकी हैं, जहां फैसला होते ही जमशेदपुर भाजपा की संगठनात्मक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।



