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JP Nadda का झारखंड दौरा: सियासी संकेत या सिर्फ देवघर कार्यालय उद्घाटन?

Dhanbad : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का झारखंड दौरा इन दिनों राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। देवघर में भाजपा कार्यालय का उद्घाटन, बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद और कई औपचारिक कार्यक्रमों के बीच उनके इस दौरे के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं, जबकि भाजपा इसे सिर्फ नियमित संगठनात्मक गतिविधि बता रही है।

कड़ाके की ठंड के बीच झारखंड की राजनीति गर्म है। झामुमो और भाजपा के संभावित गठबंधन की चर्चा इंटरनेट मीडिया पर तेजी से चल रही है। कुछ पोस्टों में यह तक दावा किया जा रहा है कि हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने रहेंगे, भाजपा को उपमुख्यमंत्री पद मिलेगा और केंद्र में कल्पना सोरेन को मंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि झामुमो ने “झारखंड झुकेगा नहीं” लिखकर इन अटकलों से किनारा कर लिया, वहीं भाजपा ने भी इन्हें निराधार बताया है।

इसी सियासी हलचल के बीच नड्डा का देवघर दौरा कई सवाल खड़े कर रहा है—क्या यह सिर्फ कार्यालय उद्घाटन का कार्यक्रम है, या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है? नड्डा शुक्रवार रात देवघर पहुंचेंगे और प्रदेश भाजपा कोर कमेटी के नेताओं व पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि इसमें राज्य की राजनीतिक स्थिति, संगठन सुदृढ़ीकरण और आगामी नगर निकाय चुनाव पर चर्चा होगी।

शनिवार को नड्डा बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा करेंगे और संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। वे पंडा समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे देवघर के नए भाजपा जिला कार्यालय का उद्घाटन और गुमला कार्यालय का ऑनलाइन उद्घाटन करेंगे। दोपहर में बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं से संवाद होगा, जिसे संताल परगना में भाजपा के जनाधार को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते नड्डा देवघर एम्स का भी निरीक्षण करेंगे और स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा करेंगे। शाम को वे दिल्ली लौट जाएंगे।

इस बीच गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं ने जनता को उलझन में डाल दिया है। इंटरनेट मीडिया पर “भूमिका तय” पोस्टों ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। दोनों दल इन खबरों को अफवाह बताते हुए एक-दूसरे पर हमलावर हैं।

भाजपा प्रदेश मंत्री गणेश मिश्र का स्पष्ट कहना है कि नड्डा के दौरे का किसी छिपे राजनीतिक एजेंडे से संबंध नहीं है और इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में यह दौरा भाजपा की संगठनात्मक मजबूती और संताल परगना जैसे संवेदनशील क्षेत्र में राजनीतिक पैठ बढ़ाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

नड्डा का यह दौरा आने वाले दिनों में क्या संकेत देगा—यह झारखंड की राजनीति पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल इसने सियासी हलकों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।

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