Maithon (Dhanbad): दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के जलविद्युत स्टेशनों ने इस साल बेहतर मानसून और जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर की बदौलत बंपर बिजली उत्पादन किया है। जलविद्युत केंद्रों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपने निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक उत्पादन कर बिजली की मांग पूरी करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मैथन, पंचेत और तिलैया हाइडल स्टेशनों ने तोड़े लक्ष्य
डीवीसी मैथन हाइडल स्टेशन को 117 मिलियन यूनिट का लक्ष्य मिला था, लेकिन 18 नवंबर तक इसने 164 मिलियन यूनिट उत्पादन कर लक्ष्य से 47 मिलियन यूनिट अधिक बिजली बनाई। पंचेत हाइडल स्टेशन का लक्ष्य 100 मिलियन यूनिट था, जो वर्तमान में 125 मिलियन यूनिट हो गया। तिलैया हाइडल स्टेशन से इस अवधि में 11 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन हुआ।
डीवीसी मैथन हाइडल स्टेशन के निर्माण काल से अब तक सबसे अधिक उत्पादन का रिकॉर्ड वित्तीय वर्ष 1990 में दर्ज किया गया था, जब 249 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन हुआ था। वहीं सबसे कम उत्पादन का रिकॉर्ड 1966 में था, जब केवल 66 मिलियन यूनिट बिजली बनी थी।
हाइडल स्टेशनों की तकनीकी जानकारी और योगदान मैथन हाइडल में तीन टरबाइन हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 63 मेगावाट है। पंचेत हाइडल में दो यूनिट हैं, जिनकी कुल क्षमता 80 मेगावाट है। मानसून के दौरान इन स्टेशनों से उच्च स्तर का उत्पादन संभव होता है, जबकि बाकी समय पश्चिम बंगाल को जल प्रदान करते हुए बिजली उत्पादन होता है।
सफलता का श्रेय कर्मचारियों और नेतृत्व को डीवीसी मैथन के परियोजना प्रधान सुमन प्रसाद सिंह ने हाइडल स्टेशनों के कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों और कुशल नेतृत्व की सराहना की। बेहतर मानसून के सहयोग से सभी पनबिजली केंद्र अपने लक्ष्यों से आगे निकलने में सफल रहे। डीवीसी ने कर्मचारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।
इस वर्ष की शानदार उत्पादन क्षमता से न केवल बिजली की मांग पूरी हुई, बल्कि डीवीसी के जलविद्युत केंद्रों की क्षमता और कुशल संचालन की भी पुष्टि हुई है।



