Koderma : कोडरमा जिले में छठ महापर्व की रौनक के बीच झुमरीतिलैया के नीरज सिंह स्पेन से अपने घर पहुंचे हैं। नीरज यूरोप की एक मल्टीनेशनल कंपनी में कंट्री हेड पद पर कार्यरत हैं। हर साल वे हजारों किलोमीटर की यात्रा तय कर छठ पूजा में शामिल होते हैं। उनकी आस्था और समर्पण ने स्थानीय लोगों को भी प्रेरित किया है।
नीरज सिंह का पैतृक घर झुमरीतिलैया के बिशुनपुर रोड में स्थित है। उन्होंने बताया कि लगभग 15-20 साल पहले उनकी मां छठ पूजा किया करती थीं। मां की तबीयत बिगड़ने के बाद कुछ वर्षों तक घर पर यह पूजा बंद रही। लेकिन एक दिन उन्होंने एक पुरुष को छठ करते देखा और उनकी सोच बदल गई।

नीरज ने कहा कि उस पल उन्हें एहसास हुआ कि छठ केवल महिलाओं का व्रत नहीं है। उन्होंने अपनी पत्नी निभा सिंह से चर्चा की और स्वयं छठ करने का निश्चय किया। पत्नी ने पूरे मन से उनका साथ दिया, और तब से दोनों हर साल व्रत रखते हैं। वे कहते हैं कि इस पर्व ने उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला दिया।
नीरज बताते हैं कि छठ शुरू करने के बाद से उन्हें जीवन में नई ऊँचाइयाँ मिलीं। उनका कहना है कि हर साल छठ मइया उनकी सभी मनोकामनाएँ पूरी करती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी इस पर्व को वैश्विक रूप देने पर काम कर रहे हैं। यूरोप में भी भारतीय समुदाय छठ को बड़े उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी कर रहा है।

इधर, नीरज की पुत्री मान्या सिंह ने बताया कि पिता पूरे साल यूरोप में रहते हैं। वह और उनका भाई पटना में पढ़ाई करते हैं, लेकिन छठ पूजा पर परिवार एकजुट होता है।मान्या ने कहा, “साल भर की दूरी यह चार दिन का पर्व खत्म कर देता है।” परिवार के लिए छठ सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि प्रेम और मिलन का प्रतीक है।
छठ महापर्व को लेकर कोडरमा में तैयारी जोरों पर है। घरों से लेकर घाटों तक सजावट और रोशनी की गई है। प्रवासी लोगों की घर वापसी से शहर में चहल-पहल बढ़ी है। छठ अब न केवल आस्था, बल्कि भारतीय पहचान और संस्कार का प्रतीक बन चुका है।



