Ranchi : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पूरी तरह किनारा कर लिया है। पार्टी का कहना है कि सीट बंटवारे में उसे दरकिनार किया गया। राजद और कांग्रेस ने झामुमो की मांगों को अनसुना किया। इससे बिहार में गठबंधन की खटास झारखंड में भी असर डाल सकती है।
2020 के बिहार चुनाव में भी झामुमो को इसी तरह की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। झारखंड में झामुमो ने हमेशा गठबंधन का सम्मान किया है। 2019 में राजद को सात और 2024 में छह सीटें झामुमो ने दी थीं। इसके बदले राजद के एक विधायक को मंत्री पद भी मिला।
अब झामुमो की नाराजगी झारखंड में गठबंधन पर असर डालेगी। पार्टी के पास राज्य में सबसे ज्यादा विधायक हैं। बिहार में गठबंधन की खटास के बाद झामुमो किसी भी घटक दल पर निर्भर नहीं रहेगा। यह स्थिति उन्हें झारखंड में दबदबा बनाए रखने में मदद करेगी।
झामुमो का यह कदम विपक्षी एकता को कमजोर कर सकता है। इसके बाद झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनावों पर भी असर पड़ेगा। दिशोम गुरु शिबू सोरेन की मृत्यु से रिक्त हुई सीट पर झामुमो की दावेदारी है। जून 2026 में भाजपा के राज्यसभा सदस्य दीपक प्रकाश की सीट पर भी झामुमो दावा करेगा।
बिहार चुनाव के परिणाम के बाद झारखंड में गठबंधन की समीक्षा का झामुमो ने निर्णय लिया है। यह कदम साथी दलों को चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। 14 नवंबर को बिहार चुनाव का परिणाम आने के बाद अंतिम रणनीति तय होगी। इस दौरान झामुमो मौके का फायदा उठाकर अपनी स्थिति मजबूत करेगा।
भाजपा ने इस स्थिति पर तंज कसा है। पार्टी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि झामुमो ने लगातार यू-टर्न लिया है। शुरुआत में 16 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहा, फिर घटकर छह और अंततः किसी भी सीट पर नामांकन नहीं किया। भाजपा का कहना है कि गठबंधन में झामुमो की समीक्षा को लेकर कई सवाल उठते हैं।



