Potka (Jharkhand): झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने बुधवार को गंगाडीह में आयोजित लक्ष्मी पूजा समारोह के दौरान अपने राजनीतिक सफर और झारखंड आंदोलन के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि आज झारखंड की परिस्थिति ऐसी है कि “राज्य की अस्मिता और आदिवासी जमीनों की रक्षा के लिए झारखंड आंदोलन से भी बड़ा जन-आंदोलन करने की जरूरत है।”
चंपाई सोरेन ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने गंगाडीह के लक्खी चरण कुंडू के घर से ही अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा, “उसी घर से हमने झारखंड आंदोलन की नींव रखी। उस वक्त न साधन थे, न सुविधा — हम गांव-गांव पैदल घूमकर संगठन को मजबूत करते थे। झामुमो को खून-पसीने से खड़ा किया, लेकिन आज हालात बहुत बदल चुके हैं।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने आंदोलन के दिनों में उन्होंने टाटा कंपनी, तूरामडी माइंस, नरवा माइंस और आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के हजारों मजदूरों को रोजगार दिलाने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि वह एक समय राजनीति से संन्यास लेने का विचार बना चुके थे, मगर राज्य में आदिवासी जमीनों को दान पत्र के माध्यम से हड़पने की कोशिश देखकर उन्होंने फैसला बदला।
उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि झारखंड आंदोलन से भी बड़े आंदोलन की जरूरत है। मैंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता इसलिए ली क्योंकि अब वही एक ऐसा मंच है, जहां से आदिवासियों की जमीन और अधिकार की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी जा सकती है।”
झामुमो से अलग होने पर उन्होंने दर्द जाहिर करते हुए कहा कि “जिस पार्टी को मैंने भूख-प्यास झेलकर, पैदल चलकर खड़ा किया, वही आज अपने मूल विचारों से भटक गई है। उस पार्टी में अब मुझे अपमानित महसूस होता था, इसलिए मैंने अलग राह चुनी।”
कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि झारखंड की संस्कृति, परंपरा और संघर्ष की भावना को जिंदा रखना हर झारखंडी का कर्तव्य है। उन्होंने श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की पूजा कर प्रदेश की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।



