Medininagar (Palamu) : महात्मा गांधी वर्ष 1927 में तीन दिनों के लिए पलामू आए थे। इस दौरान वे डालटनगंज स्थित छेदीलाल सर्राफ के बगान में ठहरे। गांधीजी ने यहां स्वतंत्रता संग्राम में शामिल कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उन्होंने आंदोलनकारियों का मनोबल बढ़ाते हुए संघर्ष जारी रखने का संदेश दिया।
11 जनवरी 1927 को डालटनगंज म्युनिसिपल बोर्ड की ओर से गांधीजी का अभिनंदन किया गया। उन्हें अभिनंदन पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही नागरिक मंच की ओर से अध्यक्ष जयवंश सहाय ने भी गांधीजी को अभिनंदन पत्र भेंट किया। यह अवसर पलामू के इतिहास का गौरवशाली क्षण बना।
पलामू प्रवास के दौरान गांधीजी ने मारवाड़ी पुस्तकालय का भी दौरा किया। उन्होंने पुस्तकालय के रजिस्टर पर शुभकामनाएं लिखीं। उन्होंने उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए पुस्तकालय की सराहना की। यह लिखित संदेश आज भी इतिहास की धरोहर माना जाता है।
अमित सहाय, जो स्वतंत्रता सेनानी नीलकंठ सहाय के पुत्र और जयवंश सहाय के पौत्र हैं, बताते हैं कि गांधीजी के आगमन पर विशेष आयोजन हुआ था। म्युनिसिपल बोर्ड और नागरिक मंच दोनों ने मिलकर उनका अभिनंदन किया। यह पल स्थानीय लोगों के लिए अविस्मरणीय बन गया।
गांधीजी छेदीलाल सर्राफ के बगान में ही ठहरे थे। वहीं वे स्वतंत्रता सेनानियों से मिलते और उनका मनोबल बढ़ाते थे। देश की आज़ादी के संघर्ष में पलामू की भूमिका को उन्होंने सराहा। उनके शब्दों ने स्वतंत्रता संग्राम के योद्धाओं को नई ऊर्जा दी।
गांधीजी का पलामू दौरा इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। उनका अभिनंदन और पुस्तकालय में दी गई लिखित टिप्पणी आज भी गर्व से याद की जाती है। इस यात्रा ने पलामू को स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों से जोड़ दिया।



