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बच्चों ने दिखाया दम : शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान, समाज में बदलाव की मिसाल।

Khunti: डोल्डा बग्मा और सुरुंडा गांवों में बाल कल्याण संघ के तत्वावधान में शिक्षक दिवस के अवसर पर एक भव्य शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बच्चों और ग्रामीणों की पहल पर आयोजित हुआ। देशभर में जहाँ 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है, वहीं इन गांवों के बच्चों ने सामाजिक जिम्मेदारी और उत्साह का परिचय देते हुए विशेष आयोजन कर अपने शिक्षकों, मार्गदर्शकों और समाज के प्रबुद्ध जनों को सम्मानित किया।

बच्चों की शानदार प्रस्तुतियाँ

इस अवसर पर बाल मंच के बच्चों ने गीत, नाटक, कविता और भाषण के माध्यम से शिक्षकों के योगदान, शिक्षा के महत्व, बच्चों के अधिकारों और समाज में सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता पर प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं। बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया और यह स्पष्ट किया कि अवसर मिलने पर बच्चों में कितनी अद्भुत ऊर्जा और प्रतिभा होती है।

बाल मंच : बच्चों का नेतृत्व और संवाद का मंच

कार्यक्रम में बाल मंच की केंद्रीय भूमिका रही। बाल मंच बच्चों को अपनी समस्याएँ, विचार, सपने और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने का मंच देता है। यहाँ बच्चे नेतृत्व क्षमता विकसित करते हैं, संवाद की कला सीखते हैं, एक-दूसरे का सहारा बनते हैं और समाज में अपनी भूमिका को समझते हुए आत्मनिर्भर बनते हैं।

बाल मंच बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व, संवाद कौशल, समस्या समाधान की क्षमता, टीमवर्क, सहानुभूति, जिम्मेदारी, संगठन, निर्णय क्षमता और सामाजिक भागीदारी जैसे जीवन कौशल विकसित कर रहा है। इसके कारण बच्चे निडर होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

बच्चों के प्रयास : समाज में जागरूकता का संदेश

गांव के बच्चे अब केवल स्कूल की पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आपसी सहयोग से एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। कोई बच्चा पढ़ाई में पीछे हो तो उसे साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है, किसी परिवार में समस्या हो तो समाधान खोजने में मदद की जाती है, और मानव तस्करी तथा बाल श्रम जैसी बुराइयों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।

‘बचपन बुलेटिन’ : बच्चों की अपनी खबर

बाल कल्याण संघ द्वारा बिचना एवं गोडाटोली के सभी 14 गांवों में साप्ताहिक रूप से ‘बचपन बुलेटिन’ जारी किया जाता है। इसमें बाल मंच के सदस्य गांव की घटनाओं—नवजात शिशुओं की जानकारी, खेतों में फसल, त्योहारों, खेलकूद, परिवारों की समस्याएँ, शिक्षा से जुड़ी उपलब्धियाँ और अन्य गतिविधियों—को एकत्र कर साझा करते हैं। यह प्रक्रिया बच्चों में सूचना संकलन, विचार-विनिमय, संवाद और सामूहिक जिम्मेदारी का भाव विकसित कर रही है।

बच्चों की प्रतिभा को मिला मंच

मुख्य अतिथियों ने कहा कि बच्चों की प्रस्तुतियों को देखकर अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता कि उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। वास्तव में ये बच्चे बाल मंच के माध्यम से समय-समय पर विभिन्न गतिविधियों में शामिल होकर, खेल-खेल में सीखकर और एक-दूसरे का साथ देकर अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं। उन्हें केवल ऐसे अवसरों की आवश्यकता है जो उन्हें आत्मविश्वास, नेतृत्व और सहयोग के गुण विकसित करने का मौका दें।

समाज में बदलाव की नई ताकत

मुख्य अतिथियों ने बच्चों की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ये बच्चे समाज में नई ऊर्जा, जागरूकता और नेतृत्व का संदेश लेकर आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में वे बदलाव की बड़ी ताकत बन सकते हैं। बाल कल्याण संघ की यह पहल स्पष्ट करती है कि यदि बच्चों को सही दिशा, मंच, प्रशिक्षण और सहयोग मिले तो वे न केवल अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं बल्कि समाज को जागरूकता, सहयोग, आत्मनिर्भरता और संवेदनशीलता के गुणों से नई दिशा दे सकते हैं।

भारी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी

इस अवसर पर तीनों गांवों के ग्राम प्रधान, शिक्षक एंजलीना पूर्ति, रोसालिया मुंडू, अनु हंसदा पूर्ति, गांगी औरैया, एसरन पूर्ति सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया। ग्रामीणों ने भी बच्चों के उत्साह और प्रयासों की सराहना की।

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