KHUNTI : जिन खेतों में पहले अफीम की खेती होती थी, उन खेतों का जीआर लेने के बाद अब पुलिस ग्रामप्रधानों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 18(बी) के तहत नोटिस भेज रही है। इस कार्रवाई से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
ग्रामसभा में लिया गया संकल्प
पिछले 31 जुलाई को अड़की प्रखंड के कोचांग गांव में क्षेत्रीय ग्रामसभा बुलाई गई थी। इसमें दर्जनों गांवों के लोग शामिल हुए थे। बैठक में सांसद प्रतिनिधि को भी बुलाया गया था। चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि पूरा क्षेत्र अब अफीम मुक्त रहेगा और किसी को भी अफीम की खेती नहीं करने दी जाएगी।
सांसद से मुलाकात
सभा के एक महीने बाद रविवार को कोचांग क्षेत्र के लगभग 40 गांव-टोलों के ग्रामप्रधान खूंटी स्थित सांसद आवास पहुंचे। सांसद कालीचरण मुंडा के साथ बैठक में ग्रामप्रधानों ने साफ कहा कि पुलिस द्वारा भेजे जा रहे नोटिसों पर कार्रवाई बंद की जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब ग्रामीण अफीम की खेती नहीं करेंगे।
वैकल्पिक फसल की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि पहले प्रखंड कार्यालय की ओर से लाह की खेती के लिए सेमियालता के पौधे देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक पौधे नहीं मिले। कोचांग पंचायत की ओर से 6.5 एकड़ खेती के लिए आवेदन भी दिया गया था। ग्रामीणों ने सांसद से कहा कि सेमियालता और लाह की खेती अफीम का बेहतर विकल्प हो सकती है और सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए।

शिक्षा व रोजगार पर चिंता
ग्रामीणों ने क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि स्कूलों में बच्चों की संख्या घट रही है और शिक्षक समय पर नहीं पहुंचते। इससे शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है। ग्रामसभा में हरि सिंह सोय ने लैंड बैंक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पूर्व की सरकार ने आदिवासियों की सामूहिक भूमि अपने अधीन कर ली थी, जिसे अब रद्द करना चाहिए।
अपराध और गरीबी का संबंध
ग्रामप्रधानों ने कहा कि नक्सलवाद, उग्रवाद, पत्थलगड़ी विवाद, लूटपाट और अफीम की खेती का मूल कारण गरीबी और बेरोजगारी है। अगर सरकार आदिवासियों को जीने का सहारा और वैकल्पिक रोजगार दे तो पूरा इलाका अपराधमुक्त और खुशहाल हो सकता है। ग्रामप्रधानों ने सांसद को 55 पन्नों का आवेदन सौंपा, जिस पर 1111 ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं। इस मौके पर सांसद कालीचरण मुंडा ने भी कहा कि अफीम से समाज और आदिवासियों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।



