New Delhi : देश के दो अहम राज्यों West Bengal और Assam में विधानसभा चुनाव के बाद जारी एग्जिट पोल ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। अलग-अलग एजेंसियों के “पोल ऑफ पोल्स” के मुताबिक असम में National Democratic Alliance को लगातार तीसरी बार सत्ता मिलने के संकेत हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का बताया जा रहा है।
असम की बात करें तो ज्यादातर एग्जिट पोल में NDA, खासकर Bharatiya Janata Party के नेतृत्व वाले गठबंधन को बहुमत मिलता दिख रहा है। Axis My India के अनुमान के अनुसार भाजपा को 88 से 100 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस को 24 से 36 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं Matrize और People’s Pulse जैसे सर्वे भी NDA को स्पष्ट बढ़त देते नजर आ रहे हैं।
दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं है। कुछ एग्जिट पोल में भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है, तो कुछ में All India Trinamool Congress को बहुमत मिलने का अनुमान है। Matrize के अनुसार भाजपा को 146–161 सीटें और TMC को 125–140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि Chanakya Strategies ने भाजपा को 150 से अधिक सीटों के साथ बहुमत का अनुमान दिया है।

हालांकि People’s Pulse जैसे सर्वे TMC को स्पष्ट बढ़त देते हैं, जिसमें पार्टी को 177–187 सीटें मिलने का अनुमान है, जो बहुमत के आंकड़े से काफी ऊपर है। वहीं Praja Poll ने भाजपा को 178–208 सीटों के साथ बड़ी जीत का अनुमान दिया है। इस तरह अलग-अलग एग्जिट पोल के नतीजे बंगाल में असमंजस की स्थिति दिखाते हैं।
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के नेतृत्व में TMC लगातार चौथे कार्यकाल की उम्मीद कर रही है। वहीं भाजपा सत्ता-विरोधी लहर, भ्रष्टाचार के मुद्दों और नागरिकता जैसे विषयों को लेकर चुनाव मैदान में उतरी है। राज्य में इस बार 90% से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जो चुनाव को और अहम बनाता है।
हालांकि एग्जिट पोल को लेकर सावधानी भी जरूरी है, क्योंकि 2021 के पश्चिम बंगाल चुनाव में ज्यादातर एग्जिट पोल गलत साबित हुए थे। उस समय अधिकांश सर्वे भाजपा को बढ़त दिखा रहे थे, लेकिन नतीजों में TMC ने 215 सीटों के साथ भारी जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा 77 सीटों पर सिमट गई थी।
कुल मिलाकर, असम में जहां NDA की स्थिति मजबूत दिख रही है, वहीं पश्चिम बंगाल में मुकाबला बेहद रोमांचक और अनिश्चित बना हुआ है। अब सभी की नजरें वास्तविक चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि एग्जिट पोल कितने सटीक साबित होते हैं।



