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झारखंड में राज्यसभा सीटों पर सियासी रस्साकशी तेज: कांग्रेस ने ठोकी एक सीट पर दावेदारी, गठबंधन में बढ़ी हलचल

Ranchi : रांची में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी K. Raju ने साफ कर दिया है कि पार्टी इस बार राज्यसभा की एक सीट पर अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर जल्द ही झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ बातचीत की जाएगी, ताकि गठबंधन के भीतर सहमति बनाई जा सके।

दरअसल, झारखंड में इस बार राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही हैं और दोनों पर झामुमो अपनी दावेदारी जता रहा है। ऐसे में कांग्रेस की ओर से एक सीट की मांग ने महागठबंधन के भीतर नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। K. Raju का यह बयान ऐसे समय आया है जब गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच पहले से ही कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में जिला अध्यक्षों के साथ बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए K. Raju ने कहा कि कांग्रेस राज्यसभा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी गठबंधन धर्म का पालन करते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करेगी, लेकिन अपनी दावेदारी से पीछे नहीं हटेगी।

बैठक के दौरान संगठन को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। K. Raju ने कहा कि अब पार्टी में “हवाई राजनीति” नहीं चलेगी और हर पदाधिकारी को जमीनी स्तर पर काम करना होगा। नए ढांचे के तहत उपाध्यक्षों को विधानसभा स्तर, महासचिवों को प्रखंड स्तर और सचिवों को मंडल स्तर की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि संगठन को गांव-गांव तक मजबूत किया जा सके।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले 25 वर्षों में कांग्रेस संगठन के भीतर अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय से नेतृत्व विकसित करने में कमी रही है। अब पार्टी इन वर्गों को केवल वोट बैंक के रूप में नहीं बल्कि नेतृत्व के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे ड्राइंग रूम की राजनीति छोड़कर जनता के बीच जाएं और उनकी समस्याओं को उठाएं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो हाल के दिनों में बिहार और असम में सीट बंटवारे को लेकर झामुमो की नाराजगी भी सामने आ चुकी है। ऐसे में झारखंड में राज्यसभा सीटों को लेकर कांग्रेस और राजद के साथ तालमेल बन पाता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। गठबंधन के नेताओं के बीच बयानबाजी ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि अंदरखाने खींचतान जारी है।

कुल मिलाकर, झारखंड में राज्यसभा चुनाव अब सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह गठबंधन की एकजुटता और राजनीतिक संतुलन की परीक्षा बन चुका है। आने वाले दिनों में Hemant Soren की भूमिका भी अहम होगी, क्योंकि अंतिम फैसला उनके नेतृत्व में ही लिया जाएगा कि सीटों का बंटवारा कैसे होगा और कौन उम्मीदवार राज्यसभा की दौड़ में उतरेगा।

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