Ranchi: रांची में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने स्पष्ट किया है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद झारखंड में इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के बीच राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीतिक बैठक होगी। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व और हेमंत सोरेन के बीच विस्तार से बातचीत की जाएगी।
दरअसल, झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों पर इस वर्ष चुनाव होना है। एक सीट पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के कारण रिक्त हो चुकी है, जबकि दूसरी सीट भाजपा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल समाप्त होने के चलते खाली होगी। ऐसे में आगामी चुनाव में दो नए सदस्यों का चयन होना तय है, जिससे राजनीतिक समीकरणों में हलचल बढ़ गई है।
के. राजू ने साफ किया कि कांग्रेस गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी को लेकर गंभीर है और कम से कम एक सीट पर अपने उम्मीदवार को उतारने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि गठबंधन राजनीति “गिव एंड टेक” पर आधारित होती है, इसलिए अंतिम निर्णय सभी दलों के बीच सहमति से ही लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि सहयोगी दल कांग्रेस को भी उचित प्रतिनिधित्व देंगे।
झारखंड विधानसभा के वर्तमान संख्या बल पर नजर डालें तो 81 सदस्यीय सदन में इंडिया ब्लॉक की स्थिति मजबूत दिखाई देती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के 4 और सीपीआई (माले) के 2 विधायक मिलाकर कुल 56 विधायक होते हैं। यह संख्या राज्यसभा चुनाव में दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए प्रत्याशी को प्रथम वरीयता के कम से कम 27+1 वोट की आवश्यकता होती है, जो इंडिया ब्लॉक के पास आराम से उपलब्ध है। हालांकि, असली सवाल यह है कि क्या सबसे बड़े दल के रूप में JMM दोनों सीटों पर अपना दावा ठोकेगा या कांग्रेस के साथ एक-एक सीट साझा करेगा। यही मुद्दा गठबंधन के भीतर चर्चा और रणनीति का केंद्र बना हुआ है।
वर्तमान में झारखंड से राज्यसभा में कुल छह सदस्य हैं, जिनमें JMM से महुआ माजी और सरफराज अहमद, जबकि भाजपा से डॉ. प्रदीप वर्मा, दीपक प्रकाश और आदित्य साहू शामिल हैं। शिबू सोरेन के निधन के बाद एक सीट पहले ही खाली है। ऐसे में आने वाला चुनाव राज्य की राजनीति के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
JMM के नेताओं की ओर से संकेत मिले हैं कि पार्टी दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की इच्छुक है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व, खासकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेना है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन के भीतर सहमति बनती है या सीट बंटवारे को लेकर खींचतान और तेज होती है।


