Jamshedur : जमशेदपुर में ट्रेनों की लगातार देरी को लेकर जनआक्रोश अब सड़कों पर दिखने लगा है। टाटानगर रेलवे स्टेशन परिसर में रेल यात्री संघर्ष समिति द्वारा हस्ताक्षर अभियान चलाकर इस समस्या के खिलाफ आवाज उठाई गई। इस आंदोलन का नेतृत्व जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय कर रहे हैं, जिन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह आंदोलन अभी शुरुआत है, और यदि रेल प्रशासन नहीं जागा तो आगे और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।
हस्ताक्षर अभियान में बड़ी संख्या में यात्रियों ने भाग लिया और अपनी समस्याएं दर्ज कराईं। लोगों का कहना है कि कोरोना काल के बाद से ट्रेनों की समयबद्धता पूरी तरह बिगड़ गई है। कई ट्रेनें टाटानगर पहुंचने में 3 से 5 घंटे तक लेट हो रही हैं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या से नौकरीपेशा लोग, छात्र, मरीज और व्यापारी वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
इस अभियान के दौरान सरयू राय ने खुद हस्ताक्षर कर आंदोलन को समर्थन दिया और कहा कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आम जनता की परेशानी से जुड़ा सवाल है। उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों से भी इस जनहित के मुद्दे पर साथ आने की अपील की। उनके अनुसार, यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
अभियान के दौरान यात्रियों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। कई लोगों ने बताया कि ट्रेन की देरी के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, साथ ही समय पर काम नहीं हो पाता। कुछ यात्रियों ने यह भी सुझाव दिया कि यदि ट्रेनें समय पर नहीं चलतीं, तो रेलवे प्रशासन को यात्रियों को मुआवजा देना चाहिए।
इस हस्ताक्षर अभियान में स्थानीय सामाजिक संगठनों का भी समर्थन देखने को मिला। सिंहभूम चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने भी इसमें भाग लिया और कहा कि व्यापारिक गतिविधियों पर ट्रेन लेटलतीफी का सीधा असर पड़ रहा है। चेंबर के अध्यक्ष मानव केडिया ने इस मुद्दे पर पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया।
आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्टेशन परिसर में आरपीएफ और जीआरपी के जवान तैनात रहे, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। इससे पहले भी इस मुद्दे को लेकर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जा चुका है, लेकिन अभी तक रेलवे प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
विधायक सरयू राय ने दोहराया कि यात्री ट्रेनों का समय पर संचालन सुनिश्चित करना रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अब यह आंदोलन पूरे शहर में चलाया जाएगा और जनता की आवाज को हर स्तर तक पहुंचाया जाएगा। साफ है कि अगर समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।


