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रांची में भाजपा के महिला आक्रोश मार्च पर सियासी घमासान: कांग्रेस-राजद ने साधा निशाना, उठाए भागीदारी और मंशा पर सवाल

Ranchi : रांची में भाजपा द्वारा निकाले गए महिला आक्रोश मार्च के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 से जुड़े विवाद के बीच आयोजित इस मार्च को लेकर अब सत्ताधारी दलों—कांग्रेस और राजद—ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

भाजपा इस मुद्दे पर लगातार कांग्रेस और विपक्षी दलों को घेरते हुए उन्हें “महिला विरोधी” करार दे रही है। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष के रुख के कारण महिलाओं को उनके राजनीतिक अधिकारों से वंचित होना पड़ा। इसी को लेकर राजधानी में महिला मोर्चा के नेतृत्व में आक्रोश मार्च निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।

हालांकि, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस मार्च पर तंज कसते हुए इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि यह रैली खुद भाजपा द्वारा बनाए गए मुद्दे पर “नाटक” है। उन्होंने दावा किया कि मार्च में करीब 90% पुरुष और मात्र 10% महिलाएं शामिल थीं, जो भाजपा की वास्तविक सोच को उजागर करता है।

सोनाल शांति ने आगे कहा कि अगर भाजपा वास्तव में महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देना चाहती है, तो लोकसभा की 543 सीटों में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव लाए। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर पूरा विपक्ष समर्थन देने को तैयार है, लेकिन भाजपा और उससे जुड़े संगठनों की नीयत पर उन्हें संदेह है।

वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने भी भाजपा के इस मार्च को “ढोंग” करार दिया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता कैलाश यादव ने आरोप लगाया कि 2023 में महिला आरक्षण बिल सर्वसम्मति से पारित होने के बावजूद उसे लागू नहीं किया गया और अब संशोधन के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।

कैलाश यादव ने यह भी कहा कि आक्रोश मार्च के दौरान भाजपा का “वास्तविक चेहरा” सामने आया, जहां मंच पर पुरुष नेता थे और महिलाएं सड़कों पर नारे लगा रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं की हितैषी नहीं है और यह पूरा आयोजन सिर्फ राजनीतिक दिखावा है।

इस पूरे विवाद ने महिला आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे को एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में ला दिया है। जहां एक ओर भाजपा इसे महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और दिखावे के तौर पर देख रहा है।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह बहस वास्तविक नीति और फैसलों तक पहुंचती है या फिर सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाती है। फिलहाल, रांची की सड़कों पर निकला यह मार्च अब राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ चुका है।

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