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तमाड़ कांड का खुलासा: 164 गिरफ्तार, पेपर लीक का कोई ठोस सबूत नहीं, सोल्वर गैंग पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

Ranchi: रांची जिले के तमाड़ क्षेत्र में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान सामने आए संदिग्ध गतिविधियों के मामले का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। रांची पुलिस ने इस प्रकरण में कुल 164 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस संबंध में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के अध्यक्ष प्रशांत कुमार, रांची उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और सीनियर एसपी राकेश रंजन ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तृत जानकारी साझा की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में पेपर लीक का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, हालांकि संगठित सोल्वर गैंग की संलिप्तता जरूर सामने आई है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि गिरफ्तार 159 अभ्यर्थियों के पास चार अलग-अलग सेट के प्रश्न पत्र मिले थे। इन सेटों में से केवल चार प्रश्न ही वास्तविक परीक्षा से मेल खाते पाए गए। कुल 120 प्रश्नों में इतनी कम समानता के आधार पर पेपर लीक की पुष्टि नहीं की जा सकती। फिर भी पुलिस इस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि किसी भी संभावित साजिश का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके।

जांच के दौरान अंतरराज्यीय सोल्वर गैंग के सरगना अतुल वत्स समेत पांच मुख्य आरोपियों की पहचान की गई है, जो बिहार के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली कराने में सक्रिय रहा है। सरगना का आपराधिक इतिहास भी काफी लंबा है और वह पहले भी कई चर्चित भर्ती परीक्षा घोटालों में संलिप्त रहा है।

पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 11 अप्रैल 2026 को मिली एक गुप्त सूचना से हुई, जिसमें बताया गया कि तमाड़ थाना क्षेत्र के एक अर्द्धनिर्मित भवन में 150 से अधिक अभ्यर्थियों की संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने विशेष टीम गठित कर देर रात छापेमारी की। पुलिस को देखते ही वहां मौजूद लोग भागने लगे और अपने पास मौजूद दस्तावेजों को छिपाने या नष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने सभी को नियंत्रित कर तलाशी अभियान चलाया।

छापेमारी के दौरान मौके पर कुल 164 लोग पाए गए, जिनमें 159 अभ्यर्थी (सात महिला अभ्यर्थियों सहित) और पांच गैंग के सदस्य शामिल थे। तलाशी में प्रिंटर, संभावित प्रश्न-उत्तर के सेट, फटे हुए एडमिट कार्ड, संदिग्ध मोबाइल फोन, बैंक चेक और आठ वाहन बरामद किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि गैंग के सदस्य अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्न और उनके उत्तर रटवा रहे थे।

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि गिरोह के एजेंट अभ्यर्थियों से 10 से 15 लाख रुपये तक लेकर परीक्षा पास कराने का झांसा दे रहे थे। कई अभ्यर्थियों ने अपने मोबाइल फोन, एडमिट कार्ड और बैंक चेक तक गैंग को सौंप दिए थे, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। इस मामले में तमाड़ थाना कांड संख्या-21/26 के तहत 12 अप्रैल 2026 को प्राथमिकी दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

प्रशासन ने इस पूरे प्रकरण पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि ऐसे संगठित गिरोहों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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