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राजेश ठाकुर का चुनाव आयोग पर तीखा हमला: ‘बीजेपी की अनुषंगिक इकाई’ बताया, ममता सरकार और विपक्षी दलों पर भी साधा निशाना

Dumka: कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल चुनाव में मुर्शिदाबाद के पर्यवेक्षक बनाए गए राजेश ठाकुर ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दुमका परिसदन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने निष्पक्ष संवैधानिक संस्था की बजाय भारतीय जनता पार्टी (BJP) की “अनुषंगिक इकाई” के रूप में कार्य किया है, जिसके परिणामस्वरूप लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए।

राजेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि SIR अभियान के दौरान न्यायिक अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में रही, जिससे पूरी न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के पीछे मतदाताओं को मतदान से वंचित करने की साजिश है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंची है। ठाकुर ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग झारखंड में इसी तरह की प्रक्रिया अपनाने की कोशिश करता है, तो कांग्रेस इसका कड़ा विरोध करेगी और “सच्चाई को सामने लाएगी।”

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पूरे मामले को सही ढंग से संभालने में विफल रही, जिससे आम जनता में आक्रोश पैदा हुआ है। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल की जनता अब भाजपा और तृणमूल कांग्रेस, दोनों दलों के “कारनामों” को समझ चुकी है और एक विश्वसनीय विकल्प की तलाश में है।

राजेश ठाकुर ने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस पर नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी समाज में “मोहब्बत का पैगाम” देने वाली पार्टी है। उन्होंने दावा किया कि इन दोनों दलों ने चुनावी लाभ के लिए कुछ नेताओं का इस्तेमाल किया, लेकिन अब जनता के सामने उनकी रणनीति उजागर हो चुकी है। ठाकुर ने विश्वास जताया कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को जनता का समर्थन मिलेगा और पार्टी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरेगी।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के तृणमूल कांग्रेस के चुनाव प्रचार में शामिल होने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकुर ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का गठबंधन केवल झारखंड तक सीमित है। उन्होंने कहा कि JMM अन्य राज्यों में अपना राजनीतिक विस्तार करना चाहती है, जिसके तहत उसने असम विधानसभा चुनाव में भी अपने प्रत्याशी उतारे।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए राजेश ठाकुर ने कहा कि चुनाव के बाद उनकी बयानबाजी यह संकेत देती है कि वे “पूर्व मुख्यमंत्री” बन चुके हैं। ठाकुर ने दावा किया कि असम की जनता ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया है और चुनाव परिणाम इसका प्रमाण होंगे।

कुल मिलाकर, राजेश ठाकुर के इन बयानों ने पश्चिम बंगाल और असम की राजनीति के साथ-साथ चुनाव आयोग की भूमिका पर भी बहस को तेज कर दिया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियों के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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