Palamu: झारखंड में भाषा नीति को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने झारखंड पात्रता परीक्षा (Jharkhand Eligibility Test) में पलामू, गढ़वा और लातेहार जिलों के लिए चयनित भाषाओं का विरोध करते हुए बड़े स्तर पर आंदोलन की घोषणा की है। इस आंदोलन की शुरुआत पलामू से होगी, जिसमें हजारों युवाओं के शामिल होने की संभावना है। आंदोलन का नेतृत्व BJP युवा मोर्चा कर रहा है।
विवाद की जड़ झारखंड पात्रता परीक्षा में इन जिलों के लिए स्थानीय भाषा के रूप में नागपुरी और कुडुख (उरांव) को शामिल किया जाना है। बीजेपी का आरोप है कि इन क्षेत्रों में भोजपुरी, नागपुरी और अंगिका का व्यापक प्रचलन है, जबकि कुडुख भाषा यहां के अधिकांश युवाओं के लिए प्रासंगिक नहीं है। पार्टी ने इसे पलामू क्षेत्र के साथ “सौतेला व्यवहार” करार दिया है।
पलामू में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोला। इस दौरान Alok Chaurasia ने कहा कि सरकार लगातार पलामू के लोगों की उपेक्षा कर रही है और अब क्षेत्र के युवा चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यह आंदोलन डालटनगंज से लेकर रांची तक व्यापक रूप लेगा।
वहीं Dr. Shashi Bhushan Mehta ने कहा कि भाषा का मुद्दा कई बार विधानसभा में उठाया गया, लेकिन सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना था कि क्षेत्र के अधिकांश युवा कुडुख भाषा से परिचित नहीं हैं और न ही इसकी पढ़ाई स्थानीय स्तर पर होती है, जिससे उनकी प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी।
आंदोलन की रूपरेखा के तहत BJP युवा मोर्चा शुक्रवार को मानव श्रृंखला बनाकर भाषा नीति के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएगा। इसके बाद इस आंदोलन को राज्यव्यापी स्वरूप देते हुए रांची तक मार्च निकाला जाएगा, ताकि सरकार पर निर्णय में संशोधन का दबाव बनाया जा सके।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा के जिला अध्यक्ष अमित तिवारी, युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष विपुल गुप्ता और वरिष्ठ नेता श्यामनारायण दुबे सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह आंदोलन केवल भाषा का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय पहचान और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाषा का यह विवाद आने वाले समय में झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या बीजेपी के आंदोलन का कोई ठोस प्रभाव पड़ता है।



