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वित्तीय प्रबंधन में झारखंड बना देश का तीसरा राज्य, हेमंत सरकार ने अपनाई रणनीति नंबर वन बनने की

Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य के वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाने और इसे देश में नंबर वन बनाने के लक्ष्य पर काम तेज कर दिया है। नीति आयोग की हालिया Fiscal Health Index 2026 रिपोर्ट में झारखंड ने तीसरा स्थान हासिल किया है, जिससे राज्य सरकार उत्साहित है और अब पहले स्थान तक पहुँचने की तैयारी कर रही है।

राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि नीति आयोग की रिपोर्ट राज्य के लिए उत्साहवर्धक है। उन्होंने कहा कि केंद्र से मिलने वाली हिस्सेदारी सीमित होने के बावजूद, राज्य अपने संसाधनों को बढ़ाकर राजस्व लक्ष्य को बढ़ाने की योजना बना रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार झारखंड ने ओड़िशा और गोवा को पीछे छोड़ते हुए तीसरा स्थान प्राप्त किया है। यह रैंकिंग राज्य के राजकोषीय प्रबंधन, ऋण स्थिरता और राजस्व प्रदर्शन के आधार पर तय की गई है। गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल करना राज्य के लिए बड़ी कामयाबी है।

वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य को अब अपने पैरों पर खड़ा होना होगा। वर्तमान में माइनिंग सेक्टर से लगभग 11,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, जबकि ओडिशा में यह 40,000 करोड़ से अधिक है। सरकार अब एक मैकेनिज्म तैयार कर रही है ताकि माइनिंग से 50,000 से 60,000 करोड़ रुपये वार्षिक राजस्व प्राप्त किया जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि जीएसटी में बदलाव के कारण झारखंड को करीब 5,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। मनरेगा के नए प्रावधानों और केंद्र से सहायता मद में कमी के कारण राज्य पर लगभग 16,000 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा। 2026-27 में राज्य का स्टेट ओन टैक्स लगभग 46,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य है, जिसे बढ़ाकर 70,000–75,000 करोड़ तक ले जाने की योजना है।

नीति आयोग ने रिपोर्ट में झारखंड के वित्तीय प्रबंधन की सराहना की है। आयोग ने पाया कि राज्य का राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3 प्रतिशत से नीचे रखा गया है, जबकि कुल राजस्व में कर राजस्व की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक है। इससे सरकार की कर संग्रह प्रणाली की प्रभावशीलता और पारदर्शिता स्पष्ट होती है।

इसके साथ ही नीति आयोग ने झारखंड के व्यय ढांचे को संतुलित बताया है और प्रशासनिक खर्चों के बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं में निवेश बढ़ाने की सराहना की है। आयोग ने कर्ज प्रबंधन को भी संतोषजनक माना और निवेश को आकर्षित करने के लिए कैपिटल खर्च की गुणवत्ता में सुधार और प्रोत्साहन देने की सलाह दी है।

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