Hazaribagh: हजारीबाग जिले में नाबालिग बच्ची की हत्या के मामले ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस जांच में जो सच सामने आया, वह बेहद भयावह है—एक मां ने अपने ही बेटे के स्वास्थ्य के लिए अपनी मासूम बेटी की बलि दे दी।
यह सनसनीखेज मामला विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुंबा गांव का है, जहां पुलिस ने इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें बच्ची की मां रेशमी देवी, गांव का भीम राम और शांति देवी उर्फ भगतिनी शामिल हैं, जो कथित तौर पर झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र करती थी।
जांच के अनुसार, रेशमी देवी अपने बेटे की शारीरिक और मानसिक परेशानी से परेशान थी और पिछले एक साल से भगतिनी के संपर्क में थी। भगतिनी ने उसे विश्वास दिलाया कि बेटे को ठीक करने के लिए किसी कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी। हैरानी की बात यह है कि मां इस बात के लिए तैयार हो गई और अपनी ही बेटी को इस कृत्य के लिए चुन लिया।
घटना के दिन रामनवमी के अष्टमी पर बच्ची को बहाने से पूजा के लिए भगतिनी के घर लाया गया। वहां पहले तंत्र-मंत्र की प्रक्रिया शुरू की गई, बच्ची को मंदिर में बैठाकर सिंदूर-काजल लगाया गया और प्रसाद दिया गया। इसके बाद रात में उसे सुनसान जगह ले जाया गया, जहां कथित अनुष्ठान के नाम पर उसकी हत्या कर दी गई।
पुलिस के मुताबिक, पहले बच्ची का गला घोंटा गया और फिर पत्थर से सिर पर वार कर उसकी हत्या की पुष्टि की गई। इसके बाद भी आरोपी नहीं रुके—मृत शरीर के साथ बर्बरता की गई और खून का इस्तेमाल तांत्रिक क्रियाओं में किया गया। इस पूरी वारदात ने अंधविश्वास की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी भीम राम और बच्ची की मां के बीच लंबे समय से अवैध संबंध थे, जिससे पूरे परिवार पर उसका प्रभाव था। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म या अंग-भंग की पुष्टि नहीं हुई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड पुलिस ने एसआईटी का गठन किया था, जिसकी जांच के बाद यह पूरा सच सामने आया। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि इस मामले में स्पीडी ट्रायल चलाया जाएगा ताकि दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिल सके।
इस घटना के बाद प्रशासन ने पीड़ित परिवार को मिलने वाली मुआवजा राशि भी फिलहाल रोक दी है, क्योंकि परिवार के ही लोग इस जघन्य अपराध में शामिल पाए गए हैं। यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।


