Ranchi: रांची में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच झारखंड सीआईडी की साइबर क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिली है। टीम ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताकर लोगों को डराता था और उनसे मोटी रकम वसूलता था। इस मामले में पीड़ित से करीब 10 लाख रुपये की ठगी की गई थी।
सीआईडी अधिकारियों के अनुसार, यह मामला झारखंड के एक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसे साइबर ठगों ने फोन कर खुद को ईडी अधिकारी बताया और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दी। इसके बाद पीड़ित को मानसिक दबाव में डालकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹10,00,047 ट्रांसफर करवा लिए गए।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बिहार के दरभंगा से सूरज कुमार चौधरी नामक आरोपी को गिरफ्तार किया। वह एक पॉइंट ऑफ सेल (POS) एजेंट यानी सिम कार्ड विक्रेता था, जिसने फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड उपलब्ध कराए थे। इन्हीं सिम कार्डों का इस्तेमाल कर साइबर गिरोह ने ठगी की वारदात को अंजाम दिया।
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पुलिस ने आरोपी के पास से मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। शुरुआती पूछताछ में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह में कई अन्य लोग शामिल हैं, जिनकी पहचान कर गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। यह एक संगठित नेटवर्क होने की आशंका जताई जा रही है।
इस मामले में साइबर थाना में पहले ही प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। केस में आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
सीआईडी ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह भी दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे की मांग नहीं करती और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती। ऐसे कॉल आने पर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
आम नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी अज्ञात कॉल या दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें। यदि इस तरह की कोई घटना सामने आती है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। जागरूकता ही इस तरह के साइबर अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।



