Dhanbad: धनबाद के सिंदरी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बलियापुर प्रखंड में हालिया बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कोयले के लिए पहचान रखने वाले इस इलाके में बड़ी संख्या में लोग खेती पर निर्भर हैं, लेकिन अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी आजीविका को गहरा झटका दिया है।
कुछ दिन पहले तक जिन खेतों में भिंडी, करेला, बरबट्टी (लोबिया) और खीरे की फसलें लहलहा रही थीं, आज वहां बर्बादी का मंजर देखने को मिल रहा है। खेतों में टूटे पौधे, कीचड़ में दब चुकी बेलें और सूनी पड़ी जमीन किसानों के दर्द को बयां कर रही है।
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स्थानीय किसान सुरेश महतो ने बताया कि यही खेती उनके परिवार का सहारा थी। अब फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आगे घर कैसे चलेगा। उनकी चिंता सिर्फ वर्तमान तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य को लेकर भी है।
वहीं किसान लक्ष्मी महतो ने बताया कि इस बारिश और ओलावृष्टि से उन्हें करीब 15 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि महीनों की मेहनत एक झटके में खत्म हो गई और अब आर्थिक स्थिति संभालना मुश्किल हो गया है।
किसान तपन महतो ने भी अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि सब्जियों के साथ-साथ सरसों की फसल भी बर्बाद हो गई है, जिससे साल भर के लिए तेल की व्यवस्था होती थी। अब उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है।

यह नुकसान सिर्फ फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के सपनों और उम्मीदों को भी तोड़ गया है। पहले से बढ़ती लागत और महंगाई से जूझ रहे किसानों के लिए यह आपदा किसी बड़े आर्थिक संकट से कम नहीं है।
अब इन किसानों की नजरें सरकार की ओर टिकी हैं। वे उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द सर्वे कर उचित मुआवजा दे, ताकि वे दोबारा खेती शुरू कर सकें और अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकें।



