Ranchi: खूंटी विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामसूर्या मुंडा ने आज झारखंड विधानसभा के शून्यकाल के दौरान पंचायत स्तर पर डिजिटल सेवाओं की बदहाल स्थिति का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से स्थापित प्रज्ञा केंद्र (CSC) अपनी मूल भावना के अनुरूप काम नहीं कर पा रहे हैं।
विधायक ने कहा कि सरकार की मंशा थी कि पंचायत स्तर पर ही आम लोगों को आधार कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, बैंकिंग, पेंशन, मनरेगा सहित अन्य आवश्यक सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें। लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है। कई जगहों पर ये सेवाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
उन्होंने बताया कि इन सेवाओं के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी निभाने वाले वीएलई (Village Level Entrepreneur) को भी उनके कार्य के अनुरूप उचित पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है। इसके कारण उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है और कई स्थानों पर सेवाएं बाधित हो रही हैं।
विधायक रामसूर्या मुंडा ने कहा कि जब पंचायत स्तर पर ही सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तो ग्रामीणों को मजबूरी में प्रखंड कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है, जो ग्रामीण जीवन के लिए एक बड़ी समस्या बनती जा रही है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि पंचायत स्तर पर सभी डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और वीएलई के लिए न्यूनतम मानदेय तय किया जाए, ताकि वे बेहतर तरीके से अपनी सेवाएं दे सकें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के लिए जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
इस मुद्दे के उठने के बाद उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी, जिससे ग्रामीणों को उनके नजदीक ही बेहतर और सुगम डिजिटल सेवाएं मिल सकें।



