Khunti: झारखंड सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति के तहत चलाए जा रहे अभियान में खूंटी पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीएलएफआई (PLFI) का सक्रिय सदस्य एवं एरिया कमांडर हाबिल मुंडू उर्फ प्रफुल्ल मुंडू (लगभग 30 वर्ष) ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। वह खूंटी जिले के मुरहू थाना क्षेत्र स्थित बम्हनी गांव का निवासी है। 
हाबिल मुंडू ने मंगलवार को खूंटी जिला पुलिस मुख्यालय पहुंचकर उपायुक्त आर रॉनिटा और पुलिस अधीक्षक मनीष टोप्पो की उपस्थिति में हथियार डालते हुए आत्मसमर्पण किया। इस दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसपी मनीष टोप्पो ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए इसे नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धि बताया। 
हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण
एसपी ने बताया कि हाबिल मुंडू पर झारखंड पुलिस द्वारा 1 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के दौरान वह अपने साथ दो पिस्टल, एक देशी कट्टा, 13 जिंदा गोलियां और दो वॉकी-टॉकी लेकर पहुंचा था। उसने उपायुक्त की मौजूदगी में सभी हथियार पुलिस को सौंप दिए।
नक्सल उन्मूलन नीति का दिख रहा असर
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। लगातार पुलिस दबाव, संगठन के भीतर मतभेद, शोषण और कठिन जीवनशैली के कारण उग्रवादी या तो भाग रहे हैं या मुख्यधारा में लौट रहे हैं। हाबिल मुंडू का आत्मसमर्पण भी इसी कड़ी का हिस्सा है। 
20 से अधिक संगीन मामलों में था वांछित
हाबिल मुंडू के खिलाफ मुरहू, खूंटी, तोरपा और कर्रा थाना क्षेत्रों में हत्या, लूट, रंगदारी, आर्म्स एक्ट सहित 20 से अधिक मामले दर्ज हैं। उसके आपराधिक इतिहास में कई चर्चित घटनाएं शामिल हैं—
वर्ष 2013: तोरपा क्षेत्र में हथियार के साथ गिरफ्तारी
वर्ष 2014: मोटरसाइकिल लूट और रंगदारी
वर्ष 2015: किसानों को धमकाकर फसल नष्ट करना और लूटपाट
वर्ष 2016: बैंक कर्मी से लूट, हत्या और सड़क निर्माण में बाधा
वर्ष 2024: सड़क हादसे से जुड़ा मामला
वर्ष 2025: लेवी वसूली और फायरिंग की घटनाएं
इसके अलावा वह कई बार पुलिस मुठभेड़ों और आपराधिक साजिशों में भी शामिल रहा है।
2012 में संगठन से जुड़ा, बना एरिया कमांडर
हाबिल मुंडू वर्ष 2012 में PLFI से जुड़ा और धीरे-धीरे सक्रिय सदस्य से एरिया कमांडर बन गया। संगठन के लिए उसने लेवी वसूली, हथियार संचालन, धमकी और कई हिंसक वारदातों को अंजाम दिया। हाल के वर्षों में भी वह मोबाइल ऐप्स के जरिए रंगदारी वसूली और फायरिंग जैसी घटनाओं में सक्रिय था।
आत्मसमर्पण के पीछे पछतावा और पारिवारिक कारण
आत्मसमर्पण के बाद हाबिल मुंडू ने कहा कि उसे अब एहसास हुआ कि उसने गलत रास्ता चुना था। संगठन के भीतर मतभेद और निजी जीवन की जिम्मेदारियों ने उसे यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
वहीं उसकी पत्नी रंदेय कंडीर ने बताया कि उनकी शादी तीन वर्ष पहले हुई थी और तब से ही परिवार के लोग उसे आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित कर रहे थे। अब उनका एक बच्चा भी है, जिसके बेहतर भविष्य के लिए हाबिल ने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
सरकार देगी पुनर्वास की सुविधाएं
आत्मसमर्पण के बाद जिला प्रशासन द्वारा सरकार की नीति के तहत हाबिल मुंडू को 1 लाख रुपये का चेक प्रदान किया गया। उपायुक्त आर रॉनिटा ने उसे बेहतर जीवन की शुभकामनाएं देते हुए अन्य भटके युवाओं से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
पुलिस को मिल सकती है अहम जानकारी
पुलिस का मानना है कि हाबिल मुंडू के आत्मसमर्पण से PLFI संगठन की गतिविधियों, नेटवर्क और अन्य उग्रवादियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इससे नक्सल विरोधी अभियान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।



