Ranchi: झारखंड में एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य में गैस सप्लाई की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव का असर देश के साथ-साथ झारखंड पर भी पड़ रहा है।
मंत्री ने बताया कि गैस की कमी के कारण उपभोक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहरी इलाकों में गैस रिफिल बुकिंग की अवधि 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि 45 दिन कर दी गई है। पहले जहां बुकिंग के 48 घंटे के भीतर सिलेंडर की डिलीवरी हो जाती थी, वहीं अब इसमें 3 से 4 दिन तक का समय लग रहा है।
सरकार के मुताबिक 16 मार्च 2026 तक राज्य में इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम की ओर से कुल 3,27,630 गैस रिफिल पेंडिंग हैं। इससे साफ है कि आपूर्ति में कमी के कारण गैस वितरण प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है।
मंत्री ने यह भी बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति में भारी कटौती की गई है। पहले जहां 80 प्रतिशत आपूर्ति होती थी, उसे घटाकर अब केवल 20 प्रतिशत कर दिया गया है। झारखंड में हर महीने करीब 2273.11 मीट्रिक टन कमर्शियल गैस की जरूरत होती है, लेकिन अब केवल 454.6 मीट्रिक टन गैस ही मिल पाएगी। इससे हर महीने करीब 1818.51 मीट्रिक टन गैस की कमी होने की आशंका है।
मंत्री ने कहा कि इसका असर उद्योगों, होटलों और अन्य कमर्शियल गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। रांची और जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहरों में कई उद्योगों की कैंटीन और होटल गैस सिलेंडर पर निर्भर हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि अंतरराष्ट्रीय संकट को देखते हुए एलपीजी और उर्वरक की आपूर्ति को लेकर स्पष्ट रणनीति बनाई जाए, ताकि आम लोगों और उद्योगों को परेशानी न हो।


