Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राजधानी रांची में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने विधानसभा परिसर में राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने ‘हेमंत सरकार हाय-हाय’ के नारे लगाए और छात्रों की लंबित छात्रवृत्ति समेत कई मुद्दों को लेकर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कल्याण विभाग की ओर से लंबे समय से छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं दी जा रही है, जिससे हजारों छात्र परेशान हैं। इसके अलावा उन्होंने ‘मंईयां सम्मान योजना’ का जिक्र करते हुए कहा कि पहले बड़ी संख्या में महिलाओं को योजना का लाभ देने का भरोसा दिया गया, लेकिन बाद में कई महिलाओं के नाम सूची से हटा दिए गए, जो सरकार की वादाखिलाफी को दर्शाता है।
भाजपा विधायक पूर्णिमा दास ने भी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि छात्रवृत्ति के मामले में छात्र लगातार परेशान हैं, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठी है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति की राशि पूरी तरह राज्य सरकार को ही देनी होती है और इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा नहीं होता। ऐसे में राज्य सरकार छात्रों को गुमराह करने के लिए केंद्र पर दोष मढ़ रही है।
पूर्णिमा दास ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर के दाम को लेकर विपक्ष जनता को भ्रमित कर रहा है। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध जैसे हालात का असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, लेकिन भारत ने पहले से तैयारी कर रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने 450 रुपये में गैस सिलेंडर देने का वादा किया था, वे अब अपने ही वादे को भूल चुके हैं।
इसके अलावा भाजपा विधायक ने राज्य सरकार द्वारा खरीदी गई पुलिस पेट्रोलिंग गाड़ियों के उपयोग पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इन गाड़ियों का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था सुधारने के बजाय प्रचार-प्रसार के लिए किया जा रहा है और उन्हें बिना जरूरत सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं, छात्रों, युवाओं और किसानों से किए गए वादों को पूरा करने के बजाय उन्हें ठगने का काम किया है।


