Ranchi: ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में गहराया संकट अब झारखंड के परिवारों तक पहुँच गया है। युद्ध की विभीषिका के कारण खाड़ी देशों में रह रहे झारखंड के हजारों लोगों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा है। ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर किए जा रहे जवाबी हमलों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर दी है, जिसके चलते रोजगार और धार्मिक यात्राओं के लिए वहां गए झारखंडवासियों की सुरक्षित घर वापसी की मांग अब जोर पकड़ने लगी है।
इस संकटपूर्ण स्थिति को देखते हुए झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने मोर्चा संभाला है। आयोग के उपाध्यक्ष शमशेर आलम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को औपचारिक पत्र लिखकर हस्तक्षेप की अपील की है। पत्र में आग्रह किया गया है कि केंद्र और राज्य सरकार आपसी समन्वय स्थापित कर खाड़ी देशों में फंसे झारखंड के नागरिकों की पहचान करें और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए विशेष प्रबंध करें, ताकि युद्ध की चपेट में आने से पहले वे अपने वतन लौट सकें।
अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष शमशेर आलम के अनुसार, झारखंड से बड़ी संख्या में लोग न केवल आजीविका के लिए खाड़ी देशों में हैं, बल्कि वर्तमान में कई लोग हज और उमरा जैसी पवित्र धार्मिक यात्राओं पर भी गए हुए हैं। उन्होंने बताया कि युद्ध छिड़ने के बाद से ही आयोग को लगातार वहां फंसे लोगों और उनके चिंतित परिजनों की गुहार मिल रही है। वर्तमान में रमजान का पवित्र महीना चल रहा है और ईद का त्योहार नजदीक है, ऐसे में लोग अपनों के बीच लौटने को लेकर बेहद व्याकुल हैं।
युद्ध की वर्तमान स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है, क्योंकि ईरान के जवाबी हमलों का असर अब पड़ोसी खाड़ी देशों पर भी दिखने लगा है। इन देशों में झारखंड के श्रमिक, इंजीनियर और छोटे व्यवसायी बड़ी तादाद में कार्यरत हैं। संघर्ष के विस्तार की आशंका ने वहां के औद्योगिक क्षेत्रों और रिहायशी इलाकों में भय का माहौल पैदा कर दिया है। सरकार के पास इन प्रवासियों का सुरक्षित डेटा होना और उनके लिए ‘इवेकुएशन’ (निकासी) प्लान तैयार करना अब समय की सबसे बड़ी मांग बन गई है।
अल्पसंख्यक आयोग ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल कर भारतीय प्रवासियों को सुरक्षित माहौल प्रदान करेगी। झारखंड के कई जिलों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों से लोग मजदूरी के लिए सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में जाते हैं। ऐसे परिवारों की चिंता को दूर करने के लिए आयोग ने मुख्यमंत्री से राज्य स्तर पर एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने और विदेश मंत्रालय के साथ संपर्क तेज करने का अनुरोध किया है ताकि हर जरूरतमंद तक मदद पहुंच सके।


