Khunti: कर्रा प्रखंड के गड़के गांव में रविवार को पांच गांवों की पारंपरिक पड़हा व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता पड़हा राजा धोच्चा पहान ने की। इस विशेष बैठक में लोटा, गड़के, कोने, डुफू और तुनेल गांव के पदाधिकारी एवं सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण उपस्थित हुए। 
बैठक में छोटानागपुर क्षेत्र की आदिवासी समुदाय की ऐतिहासिक पड़हा व्यवस्था को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि पड़हा व्यवस्था केवल सामाजिक ढांचा नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की स्वशासन प्रणाली का आधार है, जो सदियों से समुदाय को संगठित और संरक्षित करती आ रही है। यह व्यवस्था उस समय से अस्तित्व में है, जब देश में आधुनिक शासन प्रणाली विकसित नहीं हुई थी। 
बैठक के दौरान समाज में एकता, पारंपरिक रीति-रिवाजों की रक्षा, सामाजिक न्याय, सामूहिक निर्णय प्रक्रिया तथा क्षेत्र में निवास करने वाले सभी समुदायों के बीच आपसी समन्वय बनाए रखने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने जोर देते हुए कहा कि पड़हा व्यवस्था आदिवासी समाज की पहचान है, जिसे संरक्षित और मजबूत करना समय की आवश्यकता है। 
निर्णय लिया गया कि पांचों गांवों की संयुक्त पड़हा बैठक प्रत्येक माह अलग-अलग मौजा में क्रमवार आयोजित की जाएगी। इस सिलसिले को निरंतर जारी रखने पर भी सहमति बनी, ताकि सामाजिक मुद्दों का समय-समय पर समाधान किया जा सके और समुदाय को जागरूक किया जा सके। 
बैठक में ग्रामीणों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और हक-अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया गया। उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा कि पारंपरिक व्यवस्था को मजबूत कर ही समाज को संगठित और सशक्त बनाया जा सकता है।
बैठक में मुख्य रूप से ग्राम कोटवार डुफू के सुशील पहान, ग्राम प्रधान अजय खलखो, ग्राम प्रधान जयमंगल मुंडा, सनिका मुंडा, शिवा मुंडा सहित पांचों गांवों के सैकड़ों महिला-पुरुष उपस्थित रहे। बैठक शांतिपूर्ण और संगठित वातावरण में संपन्न हुई।



