Ranchi: रांची में रविवार को ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों के विरोध में वाम दलों और विभिन्न जनवादी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। राजधानी के परमवीर शहीद अल्बर्ट एक्का चौक पर जुटे प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां, बैनर और झंडों के साथ नारेबाजी करते हुए हमलों को तत्काल रोकने की मांग की।
प्रदर्शन में भाकपा (माले), माकपा, भाकपा, आइसा, ऐपवा और झारखंड जनाधिकार महासभा समेत कई संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से साम्राज्यवादी ताकतों का समर्थन छोड़ने और युद्ध रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहल करने की मांग की।
“अमेरिकी-इजरायली तानाशाही से दुनिया में तबाही का खतरा”
वक्ताओं ने कहा कि फिलिस्तीन में बच्चों और निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद अब ईरान पर हमले से वैश्विक अस्थिरता बढ़ रही है। उनका आरोप था कि इजरायल फिलिस्तीन पर कब्जे की कोशिश करता रहा है और अब ईरान पर बेबुनियाद आरोप लगाकर युद्ध को विस्तार दे रहा है।

झारखंड में Communist Party of India (Marxist-Leninist) Liberation के राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि अमेरिकी-इजरायली गठजोड़ से वैश्विक शांति को खतरा है और भारत सरकार की चुप्पी चिंताजनक है। उन्होंने हमलों पर तत्काल रोक लगाने और भारत सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।
वहीं Communist Party of India (Marxist) से जुड़े नेताओं ने कहा कि देश के जनवादी संगठन अमरीकी-इजरायली नीतियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते रहेंगे।
“तेल और जमीन के लिए हो रहा हमला”
ऑल इंडिया प्रगतिशील महिला संगठन (ऐपवा) की राज्य प्रमुख नंदिता ने आरोप लगाया कि यह हमला क्षेत्रीय व आर्थिक हितों से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि जमीन और तेल पर कब्जे की मंशा से ईरान पर कार्रवाई की जा रही है और भारत सरकार को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि भारत अपनी पारंपरिक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करते हुए युद्ध विराम की दिशा में पहल करे। कार्यक्रम के दौरान अमेरिका, इजरायल और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए गए।
रांची में हुए इस प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक सक्रियता को एक बार फिर सामने ला दिया है।


