Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विधानसभा परिसर में अलग-अलग मुद्दों को लेकर विधायकों का विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। एक ओर आजसू विधायक ने जंगली हाथियों के हमले का मुद्दा उठाया, वहीं झामुमो विधायक ने परिसीमन और सरना धर्म कोड को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
मांडू से आजसू विधायक निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो ने विधानसभा परिसर में तख्ती-बैनर के साथ धरना दिया। उन्होंने हाल ही में जंगली हाथियों के हमले में सात लोगों की मौत का मामला उठाते हुए सरकार से मृतकों के परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की।
निर्मल महतो ने कहा कि राज्य में बढ़ती माइनिंग और खनन गतिविधियों के कारण जंगली हाथी जंगलों से निकलकर गांवों की ओर आ रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भय का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग हाथियों की प्रभावी निगरानी करने में विफल रहा है। सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जब सरकार जंगली हाथियों को नियंत्रित नहीं कर पा रही है, तो अपराध पर कैसे नियंत्रण करेगी। उन्होंने पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय देने की मांग दोहराई।
वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक और पूर्व मंत्री हेमलाल मुर्मू ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी राज्य में प्रस्तावित परिसीमन का विरोध करेगी। उनका कहना है कि परिसीमन से लोकसभा और विधानसभा की अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
हेमलाल मुर्मू ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने जनगणना में सरना धर्म कोड से संबंधित प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा है, लेकिन इस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर सरना और आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर उठ रहे सवालों पर भी स्पष्टता होनी चाहिए, क्योंकि संसद में राष्ट्रपति भी सरकार की नीतियों और उपलब्धियों का उल्लेख करते हैं।


