Ranchi: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में स्थित चांडिल डैम से जुड़े विस्थापितों का मुद्दा सदन में उठा। झामुमो विधायक सबिता महतो ने डैम निर्माण के चार दशक बाद भी अधूरे पुनर्वास और सुविधाओं की कमी का सवाल उठाया।
उन्होंने बताया कि करीब 42 वर्ष पहले बने चांडिल डैम के कारण 84 मौजा के 116 गांव प्रभावित हुए थे। इनमें से 38 गांव पूरी तरह और 78 गांव आंशिक रूप से प्रभावित हैं। पुनर्वास नीति के तहत चयनित 22 स्थलों में से 13 का आंशिक विकास हुआ है, जबकि 9 पुनर्वास स्थल अब तक विकसित नहीं किए जा सके हैं।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए विभागीय मंत्री हफीजुल हसन ने स्वीकार किया कि 1992 में डैम निर्माण कार्य पूरा हुआ था और इससे कुल 19,177 परिवार विस्थापित हुए। उन्होंने बताया कि RL (Reduced Level) के आधार पर चरणबद्ध तरीके से पुनर्वास अनुदान का भुगतान किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि प्रथम चरण में 183 मीटर स्तर तक के गांवों के विस्थापितों को अनुदान दिया जा रहा है, जिसके लिए 13.27 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसके बाद 183 से 185 मीटर और 185 मीटर से ऊपर के स्तर वाले प्रभावित परिवारों को भुगतान किया जाएगा।
उन्होंने जानकारी दी कि अब तक 12,852 परिवारों को गृह निर्माण अनुदान दिया जा चुका है, जबकि 12,410 परिवारों को आवासीय भूखंड के बदले समतुल्य राशि प्रदान की गई है। स्वरोजगार अनुदान मद में 12,377 परिवारों को लाभ मिला है। इसके अलावा जीवन निर्वाह, परिवहन और प्रशिक्षण अनुदान भी चरणबद्ध तरीके से वितरित किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि सभी विस्थापित परिवारों तक योजनाओं का लाभ क्रमवार पहुंचाया जाएगा।


