Hazaribagh : झारखंड के निकाय चुनाव में जहां ज्यादातर प्रत्याशी बड़े-बड़े संसाधनों और प्रचार तंत्र के साथ मैदान में हैं, वहीं हजारीबाग में एक उम्मीदवार अपनी अलग राह चुनकर चर्चा में हैं। पत्रकार Arvind Rana सहयोग राशि के सहारे मेयर का चुनाव लड़ रहे हैं।

अरविंद राणा घर-घर जाकर न सिर्फ वोट मांग रहे हैं, बल्कि चुनावी खर्च के लिए लोगों से स्वैच्छिक सहयोग भी ले रहे हैं। उन्हें अब तक 10 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की छोटी-बड़ी रकम मिलाकर कुल 1 लाख 11 हजार रुपये का चंदा प्राप्त हो चुका है। इसी राशि से वे बैनर-पोस्टर छपवा रहे हैं और प्रचार के लिए बाइक में ईंधन भरवा रहे हैं।
उन्होंने निर्वाचन विभाग को दी जानकारी में अपनी कुल संपत्ति मात्र 21 हजार रुपये बताई है। उनके पास न निजी वाहन है, न मकान। अरविंद का कहना है कि समाज से सहयोग लेकर समाज के लिए काम करने की सीख उन्हें संघ की सेवा के दौरान मिली थी, और उसी सोच के साथ वे चुनावी मैदान में उतरे हैं।

छठ पूजा के दौरान खरीद दर पर बाजार लगवाने, धर्मांतरण और पशु तस्करी जैसे मुद्दों पर मुखर रहने के कारण शहर में उनकी अलग पहचान है। समर्थकों का कहना है कि पहली बार ऐसा उम्मीदवार दिख रहा है जो बड़े पूंजीपतियों के बजाय आम लोगों के सहयोग से चुनाव लड़ रहा है।
हालांकि, चुनावी राजनीति में संसाधनों की अहम भूमिका मानी जाती है। ऐसे में अरविंद राणा के सामने चुनौती सिर्फ जीतने की नहीं, बल्कि उम्मीदों पर खरा उतरने की भी होगी। फिलहाल उनका यह प्रयोग शहर में चर्चा और उत्सुकता दोनों का विषय बना हुआ है।


